रविवार के हंगामे से ममता दीदी ने साधे एक तीर से कई निशाने.ये है असली कारण

कोलकाता में रविवार देर शाम से जोरदार हंगामा चल रहा है पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सीबीआई के स्थानीय इकाई के साथ केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के विरोध में धरने पर बैठी है उनका आरोप है कि केंद्र के इशारे पर सीबीआई पश्चिम बंगाल में लगातार मनमानी कर रही है राजनीतिक आरोप प्रत्यारोपो के इस खेल में नतीजा कुछ भी निकले, लेकिन बंगाल की दीदी ममता ने अपना खेल दिखाना शुरू कर दिया है और रविवार शाम की नौटंकी से उन्होंने एक तीर से कई निशाने साध लिए है

अब यह सर्वविदित हो गया है कि सीबीआई बंगाल में बहुचर्चित शारदा चिटफंड घोटाले की जांच पिछले तीन-चार वर्षों से कर रहा है जिसमे बंगाल के लाखो लोगो के करोडो रूपये डूब गए है. इसमें जहां एक तरफ पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के एक मंत्री जेल में है तो अनेकों के ऊपर कारवाई की तलवार लटकी नजर आ रही है मामला सीबीआई के पास है और सीबीआई अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस व अन्य विभागों द्वारा उन्हें सहयोग नही दिए जाने का आरोप लगाकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है

सीबीआई से पहले शारदा चिटफंड घोटाले की जांच का जिम्मा पश्चिम बंगाल सीआईडी के प्रमुख राजीव कुमार के पास था जहां से कुछ नहीं निकला तो मामला सीबीआई को सौंपा गया. उस दौरान के सीआईडी के राज्य के प्रमुख राजीव कुमार अब पश्चिम बंगाल के पुलिस प्रमुख है.रविवार शाम सीबीआई की स्थानीय इकाई ने इसी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी राजीव कुमार के घर पर धावा बोला और उनसे शारदा चिटफंड घोटाले के बारे में पूछताछ करने की कोशिश की

बस फिर क्या था मौके की ताक में बैठी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता दीदी ने इसे हाथों हाथ लिया आश्चर्यजनक रूप से सीबीआई के छापे के कुछ ही मिनटों में वे पुलिस अधिकारी राजीव कुमार के निवास पर पहुंच गइ. स्थानीय कोलकता पुलिस ने आकर पुलिस अधिकारी राजीव कुमार के निवास पर छापे के लिए गए सीबीआई के पांचों अधिकारी को गिरफ्तार कर थाने ले आए और इधर ममता दीदी ने संविधान पर हमला करार देते हुए कोलकाता के भीड़-भाड़ वाले इलाका मेट्रो मॉल में धरने पर बैठे गई.

ममता दीदी के इस आंदोलन का देशभर से उन्हें समर्थन मिल रहा है चाहे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हो या बिहार के पूर्व मंत्री मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव या फिर उनके पुत्र तेजस्वी यादव, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, मायावती राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रमुख शरद पवार के साथ दर्जनभर नेताओं ने उन्हें समर्थन दिया मामला मोदी विरोध का था, तो कांग्रेसियों ने भी ममता के सुर में सुर मिलाना शुरू कर दिया है

जबकि हकीकत कुछ और ही है और ममता दीदी के आज शाम घटे घटनाक्रम ये इशारा कर रही है कि दीदी ममता ने एक बार फिर मंजे हुए राजनीतिज्ञ की तरह एक तीर से कई निशाने साध लिए.

आइए जाने बंगाल की दीदी ममता बनर्जी के रविवार शाम किए गए राष्ट्रीय स्तर की इस नौटंकी का कारण क्या है ? विपक्षी दलों के 22 नेताओं को कोलकाता में जमा कर 19 जनवरी को ममता ने जो रैली आयोजित की थी उससे उन्हें राष्ट्रीय पहचान मिलने की संभावना नजर आ रही थी और देशभर में उनके नाम की चर्चा अगले प्रधानमंत्री के तौर पर होने लगी थी उनके समर्थकों के साथ तृणमूल कांग्रेस के सांसद और विधायक भी जोर शोर से अपने दीदी को अगले प्रधानमंत्री के तौर पर पेश करने लगे थे लेकिन 2 दिन पूर्व पश्चिम बंगाल के नार्थ २४ परगना के ठाकुरनगर में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अभूतपूर्व रैली में उपस्थित विराट जनसमुदाय ने ममता दीदी के साथ उनके समर्थकों के दावों की हवा निकाल दी थी.और आज रविवार शाम कोलकाता में ही बिग्रेड परेड मैदान में वाममोर्चा का अभूतपूर्व रैली का आयोजन किया गया था स्थानीय अखबारों का दावा है वाम मोर्चा की रैली में दीदी के रैली से दोगुना से ज्यादा उपस्थिति थी.

स्थानीय अखबारों का दावा है कि वाम मोर्चा के सफल रैली की खबर को दबाने के लिए ममता दीदी ने जानबूझकर नौटंकी को रविवार शाम का ही समय चुना जिससे देशभर की मीडिया का ध्यान वाम मोर्चा के उस सफल रैली की तरफ न जाकर उनके इस नौटंकी पर रहे.इससे वे जहा एक तरफ केंद्र की मोदी सरकार को हड्काने में सफल हो जायेंगे वही वाम मोर्चे के प्रभाव को भी सिमित रखने में सफल होंगी

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