श्री सिद्धिविनायक मंदिर घोटाले की शिकायत शासन ने मानी उचित; दिए जांच के आदेश !

गैरकानूनी अध्ययनयात्रा के लिए देवनिधि के 13 लाख रुपयए उडाए !

श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट भ्रष्टाचारविरोधी कृति समिति ने मुंबई में 20 फरवरी 2018 को पत्रकार परिषद लेकर प्रभादेवी (मुंबई) स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर न्यास में भूतपूर्व न्यासियों ने श्रद्धालुआें द्वारा अर्पण किए हुए धन को किस प्रकार लूटा है, यह प्रमाणसहित उजागर किया था । इस लूट के संबंध में हिन्दू विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने 13 नवंबर 2017 को श्री सिद्धिविनायक मंदिर न्यास के भूतपूर्व न्यासियों के दौरे के खर्च के अनुषंग से विधि और न्याय विभाग में शिकायत की थी । उसे ध्यान में रखकर उक्त शासकीय विभाग ने आदेश दिया है कि न्यास के न्यासियों को विमान यात्रा अनुज्ञेय न होते हुए भी उन्होंने तिरुपति देवस्थान का निरीक्षण करने के लिए विमान यात्रा की । इसके साथ ही न्यासी श्री. प्रवीण नाईक मिरज के चिकित्सालय में दौरे के लिए गए थे । वहां की यात्रा के देयक स्वरूप उन्होंने पेडणे (गोवा) में भरे हुए पेट्रोल का देयक प्रस्तुत किया , इसकी विस्तृत पूछताछ करें और ब्योरा प्रस्तुत करने के लिए विभाग के सह सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति की जाए । यह जानकारी श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट भ्रष्टाचारविरोधी कृती समिति के सदस्य तथा हिन्दू विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर और हिन्दू जनजागृति समिति के प्रवक्ता श्री. सतीश कोचरेकर ने दी ।

शासन ने सिद्धिविनायक मंदिर के घोटाले के प्रकरण में पूछताछ का आदेश दिया है, इस संबंध में अधिवक्ता इचलकरंजीकर ने समाधान व्यक्त किया; परंतु तुळजापुर स्थित श्री भवानी मंदिर तथा कोल्हापुर स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर की शासकीय समितियों के घोटालों के प्रकरण में धीमी गति से चल रही पूछताछ के समान श्री सिद्धिविनायक मंदिर के घोटाले की पूछताछ प्रलंबित न रहे, ऐसी अपेक्षा व्यक्त की ।

हिन्दू जनजागृति समिति ने मांग की है कि सिद्धिविनायक न्यास के भूतपूर्व न्यासियों ने जलयुक्त शिवार और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध करवाने के दान के संबंध में बिना अनुमति अध्ययन दौरे के नाम पर किस प्रकार नियमों के विरुद्ध खर्च किया, इसके साथ ही अनेक बाते उजागर की गई थी । इसलिए  इन भूतपूर्व न्यासियों द्वारा नियमों के विरुद्ध किए खर्च की पूछताछ कर संबंधितों पर फौजदारी स्वरूप के अपराध प्रविष्ट किए जाएं तथा समयमर्यादा में अन्वेषण पूर्ण किया जाए ।

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