समस्याओं की हैट्रिक या शेठ की हैट्रिक ?

(कर्ण हिन्दुस्तानी )
आखिरकार डोम्बिवली विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार एक सेठ को टिकिट दे ही दी गई।  खुद को जनसेवक के बजाए शेठ कहलवाने में गर्व महसूस करने वाले इस तथाकथित शेठ को यदि आपको मिलना हो तो सबसे पहले शेठ के दरवाजे पर खड़े गुर्गों से मिलना पड़ता है।  यदि गुर्गों को लगा कि आपको शेठ से मिलवाना ठीक है तभी आप शेठ से मिल सकतें हैं , वरना चुनाव अथवा किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में ही आप शेठ के दर्शन कर सकतें हैं।  इन कार्यक्रमों में भी आप बिना गुर्गों की इजाजत के शेठ से अपनी समस्या नहीं बता सकते।
डोम्बिवली शहर की समस्याओं से आप भले ही त्रस्त हों मगर आपको मुस्कुराना होगा , क्योकि आपका शेठ मुस्कुराता है , भले ही आपको पेयजल ना मिले  फिर भी आपको मुस्कुराना है क्योंकि यह शेठ का फरमान है कि डोम्बिवलिवासी मुस्कुराते हुए मिलना चाहिए , आपकी दुपहिया वाहन चाहे सड़कों के गड्ढों की वजह से खटारा हो जाए मगर आपको मुस्कुराना होगा क्योंकि शेठ को मुस्कुराते हुए लोग अच्छे लगते हैं।

आपकी अपनी डोम्बिवली में आपको भले ही खंडित बिजली की आपूर्ति हो मगर आपको मुस्कुराना होगा क्योंकि शेठ मुस्कुरा रहा है। आपकी   डोम्बिवली के रेलवे स्टेशन का कल्याण तरफ का पादचारी पुल भले ही महीनों से टूटा पड़ा हो या फिर कॉपर पुल बंद कर दिया गया और आपको घंटो ट्रेफिक जाम से रोज गुजरना पड़े, मगर आपको मुस्कुराना है क्योंकि शेठ मुस्कुरा रहा है। शेठ को हैटट्रिक पूरी करनी है और आपको साथ देना है क्योंकि आप पर शेठ के राजनीतिक दल को हमेशा विजयी करने का ठप्पा जो लगा है। इस लिए यह विचार मत कीजिये कि यह  समस्याओं की हैट्रिक या शेठ की हैट्रिक ?

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