भारत की आज़ादी का कड़वा सच – (भाग – ५४ ) और कर दी गई भारत विभाजन की घोषणा !

(कर्ण हिंदुस्तानी )
जून १९४७ की तीन तारीख को हिज मेजेस्टी की सरकार ने अपने सत्ता हस्तांतरण के विचारों की घोषणा कर दी। सरकार को भरोसा था कि सारे लोग इस विचार को अपनी सहमति प्रदान करेंगे। विचारों को प्रकट करते हुए वायसराय ने कहा हम जिस प्रक्रिया की रूप रेखा दे रहे हैं उनमें जन भावनाओं की पूर्ती निहित करने का हमारा इरादा है। वायसराय ने अपनी घोषणा में पाकिस्तान के प्रांतीय तथा जिला के हिसाब से सभी सूबों को गिनाया। उसके पश्चात् प्रांतीय और राष्ट्रिय स्तर पर विधान सभा के अंदर जनमत संग्रह साधारण बहुमत के बंटवारे के पक्ष और विपक्ष में कि प्रांतों किस तरह से लिया जाएगा इसकी व्याख्या की। वायसराय ने कहा देरी से बचने के लिए प्रांतों और  प्रांतों के हिस्सों को स्वतंत्र रूप से कार्य करना होगा। वर्तमान संविधान सभा रचना का कार्य करेगी और यह संस्थाएं अपने हिसाब से नियम तय करेंगी। वायसराय ने कहा इसी के अनुसार हिज मेजेस्टी सरकार अधिवेशन के दौरान इस घोषणा के परिणाम के अनुसार लिए गए फैसले के मुताबित एक अथवा उससे अधिक उत्तराधिकारियों को स्वतंत्र उपनिवेश के तहत इसी साल सत्ता का हस्तांतरण करने के लिए एक क़ानून का प्रस्ताव लाएगी।  वायसराय के भाषण के पश्चात नेहरू और जिन्नाह दोनों का भाषण भी हुआ।  नेहरू ने अपने भाषण के अंत में जय हिन्द की घोषणा की जबकि जिन्नाह ने पकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे से अपना वक्तव्य समाप्त किया। पांच जून की प्रातः को माउंटबेटन दुबारा कुछ नेताओं के साथ विभाजन की चर्चा करने ओवल कार्यालय दाखिल हो गए। चर्चा की और नतीजा बाद में आने की बात कर मीटिंग खत्म कर दी गई। उधर ऑल इंडिया मुस्लिम लीग की आखिरी बैठक का आयोजन नई दिल्ली के होटल इम्पीरिअल में किया गया।  एक जून से दस जून १९४७ तक यह बैठक चली। इसमें चार सौ से भी ज्यादा मुसलामानों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में जो नतीजा सामने आया वह काफी भयावह था।
(जारी ……)
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