स्वामी (?) अग्निवेश जैसे हिन्दू विरोधियो की ऐसी दुर्गत तो होनी ही थी.

(कर्ण हिंदुस्तानी )
आखिरकार वही हुआ जिसका डर था। तथाकथित स्वामी अग्निवेश को कुछ लोगों ने अपने शुभ हाथों से प्रसाद दे ही दिया। अस्सी बरस की उम्र में भी जिस व्यक्ति को समझ ना हो उस व्यक्ति के साथ ऐसा ही होना चाहिए। यह बात ज़रूर है कि अग्निवेश के साथ हुई मारपीट का हम कतई समर्थन नहीं करते है., क्योंकि वैचारिक लड़ाई विचारों के आदान प्रदान से भी लड़ी जा सकती है।  मगर यह भी सच है कि कभी कभी ऐसे लोग भी सामने आ जातें हैं , जिनके लिए एक कहावत बनी है कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते।
अग्निवेश भी ऐसे ही हैं। अग्निवेश अन्ना हज़ारे के आंदोलन के समय कांग्रेस के खबरी बन कर घूम रहे थे। भगवा वस्त्र पहन कर अग्निवेश जब यह पूछते हैं कि राम और कृष्ण भगवान हैं इसका क्या सबूत है तो हमें ना जाने क्यों लगने लगता है कि ऐसे मनुष्य को पीटने में इतना वक़्त क्यों लगा दिया गया। अग्निवेश यदि ऐसा ही सवाल मुस्लिम धर्म के अनुयाइयों से करते कि पैगंबर के होने का सबूत दो या फिर ईसा मसीह के होने का सबूत दो तो शायद अब तक अग्निवेश का राम नाम सत्य हो चुका होता।
अग्निवेश दलितों के साथ बैठें , हमें कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हम छुआ छूत को मानते ही नहीं हैं। हम मानवता को मानते हैं। फिर भी यदि कोई दिखावे के लिए दलित प्रेम प्रकट करेगा तो उसकी जूते – चप्पलों से सेवा करना हमरा परम कर्तव्य है। दलितों के साथ बैठकर खुद को महान साबित करो , हमें कोई फर्क नहीं पड़ता , मगर यदि कोई हमारे मर्यादा पुरुषोत्तम और सोलह कलाओं के ज्ञाता और विश्व गुरु बनाने वाला पवित्र ग्रन्थ गीता के रचयिता भगवान श्री कृष्ण के भगवान  होने का सबूत मांगेगा तो उसे प्रसाद दिया जाना स्वभाविक hai  और प्रसाद का अर्थ ही होता है प्रभु के साक्षात दर्शन। गेरुआ वस्त्र पहन कर भी जो व्यक्ति भगवान् का मतलब ना समझता हो उसे मूर्ख ही नहीं महामूर्ख ही सम्बोधित किया जाएगा और अग्निवेश महामूर्खों में ही शामिल हैं। समाज प्रबोधन करते करते हिन्दू धर्म की आस्था के प्रतिक मर्यादा पुरुषोत्तम राम और श्रीकृष्ण पर यदि कोई ऊँगली उठाएगा तो किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
https://youtu.be/BWGHCUtupYk
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