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गंदगी भरे कल्याण रेलव स्टेशन से कैसे की जाए यात्रियों के कल्याण की उम्मीद ?

मुंबई का प्रवेश द्धार कहे जाने वाले कल्याण जंक्शन पर गंदगी का आलम यह है कि यहां स्वच्छ भारत – सुंदर  भारत का नारा भी असफल साबित  हो चुका है। कल्याण जंक्शन वैसे तो शिवाजी महाराज के पावन चरण स्पर्श से प्रफुल्लित हो चुकी है। मगर अब कल्याण स्थानक  के हालत यह हैं कि यहां सभी सुखसुविधा गंदगी की भेंट चढ़ चुकी हैं।
कल्याण पश्चिम की बात करें तो रेलवे ने यहां स्वयं चलित सीढ़ियां तो लगा दीं हैं मगर सीढ़ियों से चढ़ कर जब यात्री पादचारी पुल पर पहुँचते हैं तो पुल पर गंदगी का आलम यह होता है कि यात्रियों को अपना सामान उठाकर चलना पड़ता है। स्टेशन के बाहर पश्चिम की तरफ ऑटो स्टैंड है और साथ ही तांगा स्टैंड भी है। दोनों स्टैंड पर कूड़े का ढेर लगा रहता है। यात्रियों को बड़ी मुश्किल से ऑटो और तांगा में बैठना पड़ता है।
अब बात करते हैं प्लेटफार्म क्र एक की। यह प्लेटफार्म रेलवे की साफ़ सफाई की पोल खोलने का हर वक़्त गवाह बना रहता है।  करजत की तरफ वाली टिकट खिड़की के प्रांगण में आवारा कुत्ते मलमूत्र त्यागते दिख जाते हैं तो प्लेटफार्म पर कचरे के मलबे का ढेर जगह – जगह दिख जाएगा। सार्वजनिक शोचालय का पानी भी कभी कभार प्लेर्फोर्म की तरफ आता दिख  जाता है।
  सी एस टी की तरफ तो यह प्लेटफार्म लावारिस ही नज़र आता है। यही हाल प्लेटफार्म क्र वन ( ए ) का भी है। अब बात करते हैं प्लेटफार्म क्र दो और तीन की।। इन दोनों प्लेटफॉर्म्स का शौचालय तो अलग ही राग आलापता है। यात्री नाक बंद करके नित्यकर्म करते हैं।
प्लेटफार्म क्र चार और पांच की हालत तो  बद  से बदतर है। इन दोनों प्लेटफार्म पर सबसे ज्यादा लम्बी दूरी की  गाड़ियां आवागमन करती है। प्लेटफार्म क्र चार और पांच की वाशेबल पटरियों नही होने से परिसर में  संडास और मूत्र की दुर्गंध से पूरा परिसर बाधित होता है।
कहने को कल्याण में आठ प्लेटफार्म हैं मगर हर प्लेटफार्म की पटरियों की हालत किसी डम्पिंग ग्राउंड से कम  नहीं है। यात्रियों से सुविधा के नाम पर रेलवे विभिन्न कर तो वसूल रही है मगर यात्रियों के लिए कुछ करने को तैयार नहीं है।

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