भारत की आज़ादी का कड़वा सच – (भाग – ५७ ) भड़क उठी दंगों की आग – चारों तरफ अफरातफरी का माहौल बन गया। 

(कर्ण हिंदुस्तानी )
इधर भारतीय नेतागण आज़ादी के सूर्योदय का इंतज़ार कर रहे थे और उधर विनाश की आहत सुनायी देने लगी थी , तबाही के बारे में कुछ भी सटीक रूप से कहना उचित तो नहीं था लेकिन भविष्यवाणी तो की ही जा सकती थी। दिल्ली के एक पुलिस वाले को जब इस तरह की आशंका के बारे में किसी ने सवाल किया तो उसका कहना था कि एक दफा पंजाब में बंटवारे की सीमा रेखा खिंच जाए तो देखियेगा जनाब पश्चिम में सभी सिख और पूर्व में सभी मुसलमान मारे दिए जाएंगे। ऐसा खून खराबा होगा जिसे लोग सदियों तक याद रखेंगे। लाशें धोने वाला कोई ना होगा। १४ अगस्त १९४७ तक सिखों सहित हिन्दुओं  को पूरा विश्वास था कि लाहौर हिन्दुस्तान के पास रहेगा। यही कारण रहा कि जब विभाजन की सीमा रेखा घोषित की गई तो हिन्दुओं और सिखों को इतना समय भी नहीं मिल सका कि वह अपना कीमती सामान साथ ले सकें। हिन्दू और सिख अपनी जान बचाने के लिए पूर्व की तरफ भागने लगे।  क्योंकि मुसलामानों ने धनाढ्य हिन्दुओं और सिखों के घरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। चारों तरफ अफरातफरी का नज़ारा बन गया।  ऐसा मंज़र सामने नज़र आने लगा जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। पाकिस्तान को देश का दर्ज़ा १४ अगस्त १९४७ को दिया गया लेकिन उसके पहले ही लूटपाट मार काट मच गई थी।  हिन्दुओं और सिखों के घरों पर भीड़ हमला करने लगी थी।  घरों में महिलाओं के सामने ही उनकी बेटियों की इज़्ज़त पर हाथ डाला जाने लगा था। कीमती सामान लूटने की वारदातें आम हो गई थी। हर रोज़ दरिंदगी के नए नए किस्से सुनने को मिल रहे थे। कहीं किसी की दूकान को लूटने के बाद आग के हवाले किया जा रहा था तो कहीं दूकान को लूटने के बाद जबरन कब्ज़ा किया जा रहा था। इधर हिन्दुस्तान में जब इस बात की खबर पहुंची तो यहां के हिन्दू – सिख भड़क उठे। लाहौर और  कराची में बसे अपने रिश्तेदारों की चिंता यहां के हिन्दुओं और सिखों को सताने लगी। हिन्दुओं और सिखों को अब मुसलमान अपने दुश्मन नज़र आने लगे। आवागमन का कोई विशेष साधन ना होने की वजह लाहौर और कराची तुरंत पहुंचना भी सम्भव नहीं था। फिर यहां की जायदाद को किसी भी कीमत पर छोड़ कर जाना भी खतरे से खाली नज़र नहीं आ रहा था। हर कोई नेताओं के भरोसे बैठा था। ज़रा सी आहत होने पर रात को सारा कुनबा सहम सा जाता था। यदि कहीं कोई आग लगी दिखती थी तो सारा मोहल्ला आने वाली मुसीबत के बारे में सोच कर सहम जाता था। ऐसे समय में सड़कों पर उपद्रवी और उन उपद्रवियों का मुकाबला करने वाले ही नज़र आ रहे थे।
(जारी …………)
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