भारत की आज़ादी का कड़वा सच – (भाग – ५३ ),पाकिस्तान गठन पर अंतिम मोहर लगाने की तैयारी शुरू हुई। 

(कर्ण हिंदुस्तानी )
दो जून १९४७ वाले दिन सोमवार का सूर्य उदय हुआ और साथ ही साथ पाकिस्तान के गठन पर अंतिम मोहर लगाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई। लार्ड माउंटबेटन ने भारत के राजनीतिक नेताओं से मुलाक़ात शुरू की। तकरीबन दो घंटे तक चली इस मुलाक़ात के दौरान माउंटबेटन ने लंदन से भेजी गई बंटवारे की योजना से सभी को अवगत करवाया। वायरय ने हिज मेजेस्टी की सरकार और विपक्ष को सलाह दी कि आप सभी लोग मुझे आज रात से पूर्व अपने जवाबों को भेज दें। दो जून १९४७ की ही रात को जिन्नाह लगभग ग्यारह – साढ़े ग्यारह बजे वायसराय से मुलाक़ात करने गए। माउंटबेटन की कथनानुसार जिन्नाह तकरीबन आधे घंटे तक प्रांतों के बंटवारे के विरोध में खुद की कार्यसमिति की तरफ से विरोध जताते रहे। माउंटबेटन ने जिन्नाह से सवाल किया कि आपकी कार्यसमिति योजना को मानेगी अथवा नहीं ? जिन्नाह ने अनमने ढंग से कहा उन्हें लगता है ज़रूर मानेगी। फिर माउंटबेटन ने पूछा क्या आप स्वयं इस योजना को स्वीकार करने के लिए राजी हैं ? इस सवाल के जवाब में जिन्नाह ने कहा , मैं व्यतिगत तौर पर आपके साथ हूँ , मैं अपनी तरफ से हर संभव प्रयास करूंगा कि अखिल भारतीय मुस्लिम लीग कौंसिल भी इस मसौदे को स्वीकार कर ले। अगले दिन यानी कि तीन जून को माउंटबेटन ने जिन्नाह से कहा आपके इस रवैय्ये को कांग्रेस हमेशा शक की नज़रों से देखती है। आपका सदा एक ही तरीका रहा है कि पहले आप कांग्रेस द्वारा किसी भी योजना पर लिए गए आखिरी फैसले को देखते हैं और फैसले का इंतज़ार करते हैं ताकि आपकी मुस्लिम लीग को अनुकूल अवसर मिल जाए। जिन्नाह की चुप्पी को देखते हुए माउंटबेटन ने कहा यदि आपका यही व्यवहार रहा तो सुबह की मीटिंग में कांग्रेस के नेतागण सिख योजना पर सहमति से इंकार कर देंगे। जिसका नतीजा भारी अव्यवस्था होगा और पाकिस्तान बनाने का आपका सपना कभी पूरा नहीं होगा। जिन्नाह को माउंटबेटन से इन शब्दों की कतई उम्मीद नहीं थी।  जिन्नाह ने कहा , जो होना है वह तो होकर ही रहेगा। मुन्ट्बेटन ने सख्ती दिखाते हुए कहा जिन्नाह साहेब मैं इस समझौते के लिए की गयी मेहनत को बेकार नहीं जाने दूंगा। मैं सुबह की बैठक में आपकी तरफ से कहने वाला हूँ कि जिन्नाह ने मुझे भरोसा दिया है जिसे मैं मान चुका हूँ , जिन्नाह को मसौदा पसंद है। जब बैठक में यह बात कही जाएगी तो आपको मूक सहमति हर हाल में देनी होगी। माउंटबेटन की बात का जिन्नाह ने सिर हिलाकर दिया और उठकर चले गए।
(जारी …….)
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