डोम्बिवली में दलालों के बिना आरक्षण टिकट पाना असम्भव

रेलवे प्रशासन अपने परिसर में भ्रष्टाचार खत्म करने या कम करने की कितने भी दावेदारी कर ले लेकिन स्टेशन के आरक्षण कार्यालयों पर भ्रष्टाचार खत्म नहीं होने वाला है और इसके लिए स्टेशन परिसर में कार्यरत रेलवे कर्मियों के साथ रेलवे के वरिष्ठ अधिकारीयो की लोभी प्रवृत्ति भी उतनी ही जिम्मेदार है.

आज भी तीन चार दिन तक आरक्षण के लिए स्टेशनो पर लगातार लाइन लगाने के बावजूद रोज सुबह उनका नम्बर चौथे पाचवे पर चला जाता है और उन्हें काउंटर पर जाने के बाद वेटिंग टिकट हाथ में आता है. स्थानीय सूत्रों के अनुसार आरक्षण टिकट के इस काला बाजारी में स्टेशन परिसर के रेलवे प्रोटेक्शन फ़ोर्स RPF भी दलालों के लिए विशेष सहयोगी की तरह काम करते है. इन सब आरोपो की सच्चाई आरक्षण कार्यालय में CCTV कैमरे के फुटेज से भी जाँची जा सकती है.

ताजा मामला सोमवार शाम ७ बजे डोंबिवली रेलवे स्टेशन आरक्षण कार्यालय में बनारस के लिए तत्काल आरक्षित टिकट लेने गए डोंबिवली पूर्व के गोग्रेसवाडी निवासी अजय यादव के साथ घटित हुआ है अजय यादव अपनी मां के साथ बनारस जाने के लिए तत्काल टिकट लेने लाइन लगाई थी लाइन में वे सबसे आगे थे लेकिन रात के 11:00 बजे दलालों का एक ग्रुप वहां आया और वहां पहले से उपस्थित तत्काल के लिए लाइन लगाए लोगों पर दादागिरी करने लगा

भुक्तभोगी अजय यादव

पहले से वहां उपस्थित यात्रियों ने एक कागज पर लिस्ट बनाकर अपना नाम लिखा था जिसे इन लोगो ने फाड़ दिया और अपना नाम लिखते हुए नए कागज पर नया लिस्ट बना दिया जिसमें उन लोगों ने अपना नाम सबसे पहले लिखा इसके बाद अन्य खड़े लोगो का नाम लिखा.और चलें गए.

आश्चर्य जनक रूप सुबह 5:00 बजे फिर दलालों का एक नया ग्रुप आया जिसने वहा खड़े यात्रियों पर दादागिरी करते हुए इस लिस्ट को भी नकारते हुए नया लिस्ट बनाया. जिसमें अपना और अपने साथ आये लोगो का नाम लिखने के बाद  इस लिस्ट के नामो को लिखवाया ऐसे में शाम ७  बजे से खड़े लोगों का नाम १०वे – 12वें नंबर पर चला गया. इससे चीढकर अजय यादव ने सुबह 5:00 बजे ही डोम्बिवली आरपीऍफ़ आफिस में जाकर वहा उपस्थित पुलिस बल से शिकायत की.

 अजय यादव को इस कार्यालय में पुलिस कांस्टेबल गौड़, और पाटिल मिले. पुलिस बल ने उसे इस मामले में कोई सहयोग करने से इनकार कर दिया. और इसी कारण सुबह ११ बजे तत्काल आरक्षण शुरू होने के बाद टिकट काउंटर तक पहुचते पहुचते अजय यादव का टिकट वेटिंग में कन्वर्ट होगया था. और वे अपना आरक्षित टिकट नही बना पाया.

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