अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है कल्याण का बस स्टेन्ड। 

पुरे महाराष्ट्र के साथ गुजरात और कर्नाटक राज्य को सडक मार्ग से सीधे जोडने वाला कल्याण स्थित महाराष्ट्र राज्य पथ परिवहन निगम का बस स्टेन्ड अपनी दुर्दशाओ पर आंसू बहा रहा है. और यहाँ व्याप्त अव्यवस्थाओ पर ना तो राज्य सरकार का परिवहन मंत्रालय ध्यान दे रहा है ना ही स्थानीय कल्याण डोम्बिवली मनपा प्रशासन.इस बस स्टैंड पर ना तो साफ़ सफाई का ध्यान दिया जाता है नाही यहाँ से यात्रा करने वाले यात्रियों के सुरक्षा के लिए ही कोई विशेष इंतजाम है.और और तो और इस बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए पेयजल की सुबिधा नही है.नागरिको को यहाँ पानी खरीद कर ही पीना पड़ता है.

ज्ञात हो की कल्याण स्थित महाराष्ट्र राज्य पथ परिवहन निगम के बस डेपो में दिन भर में 80 बसे चलाई जाती है। दिन भर में ही अपनी और बाहर से आने वाली बसे यहाँ से करीबन १२०० फेरे लगाती है। जिसमे से AC की करीबन ७ बस है बाकी सामान्य।इस बस डेपो में करीबन ४५० कर्मचारी कार्य करते है और करीबन १५०००/- यात्री प्रतिदिन इस बस डेपो से सफर करते है ।

मजे की बात तो यह है की इतने बड़े स्टेन्ड पर ना तो यात्रियों और ना ही कर्मचारियों को पीने के पानी की व्यवस्था है। और गंदगी का आलम तो इस तरह का है । एक अच्छा भले आदमी को नाक पर रुमाल रखना पड़ता है, जगह जगह लवारिस आदमी सोते रहते है जिनसे आने जाने वाले यात्रियों को तकलीफ होती है।इसके साथ आये दिन बस स्टैंड पर यात्रियों के साथ पाकित्मारी की घटना आम है.

अग्रवाल समाज कल्याण ने इस बस डेपो पर यात्रियों की सुविधा के लिये पानी का प्याऊ लगा रखा है, लेकिन पानी की सप्लाई नही होने के कारण वह बन्द पड़ा है। समाज के अध्यक्ष अनिल कुमार गर्ग ने एस. टी.स्टेन्ड के प्रबंधक श्री विजय गायकवाड़ से मुलाकात की तो उन्होंने बताया कि करीब ५ महीने से बिलकुल पानी नही आया है मैने कई बार इसकी सूचना कल्याण डोम्बिवली महानगर पालिका के अधिकारियों को लिखित रूप से दी है बावजूद इसके मनपा प्रशासन के तरफ  कोई कदम नही उठाया गया। एस. टी.स्टेन्ड के प्रबंधक विजय गायकवाड़ के अनुसार हम कहा तक टैंकर मंगाये।

अग्रवाल समाज के अध्यक्ष अनिल कुमर गर्ग  ने बताया की प्रतिवर्ष हम यह पाईप  लाईन ठीक करवाते है लेकिन उसका रिजलट कुछ नही निकलता है। गत वर्ष पानी के टेंकर मुफत में आते थे अब ५०० रु. प्रति टेंकर भरना पड़ता है। मजे की बात सुरक्षा के लिये चौकी बनी है उसमें ३ से ४ पुलिस वालो की डयूटी रहती है लेकिन बस स्टेन्ड पर १५ से २०  बाइक पुलिस का स्टीकर लगी खड़ी रहती है। अनाधिकृत फेरी वालो की भीड़ तो देखने लायक है। इनको रोकने वाला कोई नही है ना तो बस स्टेन्ड प्रशासन और ना ही पुलिस कर्मचारी।

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