लोकसभा चुनाव और मतदाताओं का कर्तव्य 

(कर्ण हिन्दुस्तानी )

फिर एक बार देश में लोकसभा चुनावों की घंटी बज गई है।  सात चरणों में होने वाले इन आम चुनावों में तमाम  राजनीतिक दल  लेंगे। जनता की मेहनत की कमाई से तिजोरी में जमा हुए माल को विभिन्न योजनाओं के तहत छूट देकर जनता को ही लालायित किया जाएगा। कहीं दो रूपये किलो गेंहू देने की बात होगी , कहीं एक रूपये किलो चावल देने की  बात होगी। विभिन्न सरकारी योजनाओं को जनता के आगे करने की भी बात होगी।

राजनीतिक दलों की आपसी जंग भी प्रचार के दौरान दिखेगी।  मगर सबसे बड़ी बात यह होगी कि आखिर किस तरह से मतदाताओं को लुभाया जाए। शहरी और ग्रामीण मतदाताओं के बीच का फर्क जानकर कहीं – कहीं जाति के समीकरण भी बैठाये जाएंगे। धर्म को भी घसीटा जाएगा। लेकिन युवा मतदाताओं के हिन्दुस्तान में अब युवाओं को राजनीती को नई दिशा देने की पहल करनी होगी।

जब तक देश का युवा वर्ग राजनीती को गंभीरता से नहीं लेगा तब तक देश की राजनीती की सही दिशा तय नहीं होगी। यदि युवाओं को आधुनिक भारत और समृद्ध भारत चाहिए तो तमाम दलों के प्रलोभन से परे होकर सोचना होगा। आज सभी के हाथों में मोबाइल फ़ोन हैं।  यानी कि सम्पूर्ण विश्व युवाओं के हाथ में है। कोई भी राजनीतिक दल यदि कोई घोषणा करता है तो उसकी तह तक जाकर घोषणा की तहकीकात कोई भी कर सकता है।  संभव और असंभव को अब तौला जा सकता है।

युवाओं का देश के प्रति यदि कोई फ़र्ज़ बनता है तो वह यह है कि शत प्रतिशत युवा मतदान करें और मतदान के लिए अन्य वर्ग के लोगों को प्रेरित भी करें।  किसी भी प्रलोभन में आए बिना मतदान की प्रक्रिया में हिंसा लें।  भारत को मज़बूत बनाने के लिए ोकसभा चुनाव एक पर्व की तरह मायने रखता है।  इस पर्व में कोई भी धार्मिकता नहीं होती।  यह पर्व हम सभी देश वासियों का धर्मनिरपेक्ष पर्व है।

चुनावों के  दौरान रमज़ान और नवरात्री का भी पर्व है। दोनों धर्मावलम्बी व्रत में रहेंगे। मगर फिर भी देश के इस पर्व को मनाना ही होगा क्योंकि धार्मिक  पर्व तो हर साल तय समय पर आएँगे मगर लोकतंत्र का चुनाव रुपी पर्व पांच साल में एक बार आएगा।  धार्मिक पर्व जहां हमको परमपिता परमेश्वर के आदर्शों पर चलना सिखाता है वहीँ लोकतंत्र का चुनाव रुपी पर्व हमें देश की तरक्की का रास्ता दिखाता है।

इन लोकसभा चुनाव में देश का युवा वर्ग यदि ढंग से मतदान करता है  तो किसी भी सूरत में देश की गद्दी पर ऐसा कोई दल विराजित नहीं हो पाएगा जो देश को रसातल में ले जाए।  इसलिए युवा मतदाताओं को अपना कर्तव्य निभाना ही होगा।

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