मेहबूबा की पीडीपी से तलाक के बाद ?

(कर्ण हिंदुस्तानी )
आखिरकार भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू – कश्मीर की पी डी पी सरकार से खुद को अलग कर ही लिया। मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ़्ती के पिता मुफ़्ती मोहम्मद सईद की तरह मेहबूबा का आतंकवादियों के प्रति प्यार ज़रा ज्यादा ही उमड़ रहा था। रमज़ान का बहाना बनाकर आतंकवादियों और पत्थरबाजों को अपने आँचल में सुरक्षित रखने का काम मेहबूबा मुफ़्ती कर रहीं थीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर इसी वजह से देश भर में ताने कसे जा रहे थे। जिनकी औकात भी नहीं है वह भी राजनीती के पुरोधा बनकर सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने में लगे हुए थे। इन दो टके के राजनीतिक समीक्षकों को लग रहा था कि केंद्र सरकार ने मेहबूबा मुफ़्ती के सामने घुटने टेक दिए हैं।
मगर उन्हें यह नहीं पता था कि यह मोदी सरकार है , इस सरकार को सत्ता से ज्यादा राष्ट्र प्यारा है। राष्ट्र की खातिर ऐसी कितनी ही राज्य सरकारें कुर्बान की जा सकतीं हैं। अब सोशल मीडिया के भांड चिल्ला रहे हैं कि २०१९ नज़दीक आते देख मोदी जी ने यह फैसला लिया है।  इन भांडों को यह नहीं पता कि सत्ता से हटने का फैसला कोई खीर कुर्मा बनाने जैसा नहीं है कि मन किया जब भी फैसला लिया और झट से बना लिया।
सत्ता में रहकर ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय काफी विचार – विमर्श करना पड़ता है। मेहबूबा की विनंती पर रमज़ान में एक तरफ़ा युद्ध विराम किया गया और सबने देखा कि उसका नतीज़ा क्या हुआ ? ना सिर्फ आम नागरिक मारे गए बल्कि सम्पादक और ईद मनाने घर लौट रहे औरंगज़ेब जैसे साहसी भारतीय जवान भी मार दिए गए। मोदी सरकार पर टिप्पणी करने से पहले टिप्पणी करने वालों को यह जानना होगा कि यह मनमोहनी सरकार नहीं है जो हर बात में किसी विदेशी मैडम का मुँह देखेगी। यह सरकार स्वतंत्र निर्णय लेने वाली सरकार है।
अब जम्मू – कश्मीर में जो होगा वह सभी देखेंगे। अब जब आतंकवादियों की लाशें बिछेंगी तब यही भांड मानवता की दुहाई देंगे। रो रो कर टी वी चैनलों पर विधवा विलाप करेंगे। अखबारों में भटके हुए नौजवानों की कहानियां प्रकाशित की जाएंगीं। मोमबत्ती गैंग भी सक्रीय होकर देश भर में रोता घूमेगा। मगर अब किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।  बहुत हो गया लाड – प्यार अब होगा सीधे वार। मेहबूबा को भी पता चल गया होगा कि अब जन्नत की हुर्रें कम पड जाएंगी , इतने अल्लाह के बंदे जन्नत में भेजे जाएंगे। अतः हम तो कहते हैं कि
हर हिन्दुस्तानी का एक ही नारा है
यह तो क्या ? वह कश्मीर भी हमारा है।
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