एमएसईबी मनमाने ढंग से भेज रहा है बिजली बिल – ग्राहक परेशान

पिछले कई माह से महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी मनमाने ढंग से ग्राहकों को बिजली का बिल भेज रही है जिससे ग्राहकों में रोष और असंतोष व्याप्त है। इससे पहले भी एमएसईबी अंदाजे पर बिल भेजता था परंतु यह अपवादस्वरूप होता था लेकिन पिछले कुछ महीनों से अंदाजे पर बिल भेजना का सिलसिला बढता जा रहा है। जिसके घर में दो ट्युबलाइट और दो पंखें हैं उनके बिजली बिल भी महीने का चार-पांच हजार आ रहे हैं। शिकायत करने पर आश्वासन के अलावा ग्राहकों को कुछ नहीं मिलता और यदि बिल नहीं भरे तो कनेक्शन काट दिए जाते हैं। कई बार ऐसा देखा गया है कि कुछ प्रभावशाली या किसी तरह से सेटिंग वाले ग्राहकों के बिल मामूली सौ-दो सौ रुपए आते हैं वहीं गरीब, मजदूरी और घरों में काम करनेवाली महिलाओं के घर का बिजली बिल महीने का चार-पांच हजार रुपए आ जाते हैं। यह लॅाजिक आज तक किसी की समझ में नहीं आया।

पूर्णिमा टॉकीज चौक, कल्याण वेस्ट के पास रहने वाले राजेश मित्तल ने एक्स-रे संवाददाता को अपना बिजली बिल दिखाते हुए बताया कि उनके घर में कभी भी एक हजार से दो हजार से अधिक बिल नहीं आते थे, लेकिन इस बार उनके घर का बिजली बिल 20,290 / – रु। उन्होंने आगे बताया कि जब उन्होंने कार्यालय से पूछताछ की, तो उन्होंने बताया कि पिछले कई महीनों से मीटर की रीडिंग किसी ने नहीं ली थी, इसलिए यह जमा हो गया।

एक महीने में 1661 यूनिट की खपत हमारे बिल 20,290 रुपये पर आ गई, लेकिन अगर हर महीने नियमित रूप से लिया जाए तो यह लगभग 10,000 रुपये ही आएगा। इसलिए बिजली कंपनी की गलती के लिए हमें कीमत चुकानी पड़ती है। वे छोटे उपभोक्ताओं की कीमत पर अवैध लाभ कमा रहे हैं।

राजेश मित्तल ने आगे बताया कि इकाइयों की खपत के आधार पर स्लैब के आधार पर बिजली का शुल्क लिया जाता है, जो हर स्लैब को पार करने के बाद बढ़ता है। यदि आपकी इकाइयों की मासिक खपत 100 यूनिट से कम है, तो आपसे 3.05 रुपये प्रति यूनिट शुल्क लिया जाता है, लेकिन यदि यह मासिक 1000 यूनिट से अधिक बढ़ता है, तो शुल्क 12.50 रुपये प्रति यूनिट है जो कि चार गुना है। इसलिए, यदि यूनिटों को जमा किया जाता है या बिजली वितरण कंपनी द्वारा नियमित रूप मीटर अध्ययन से नहीं लिया जाता है तो खपत की कीमत बढ़ जाती है। इसलिए यह लागू दर से अधिक शुल्क लेना पूरी तरह से अवैध है। उन्हें नियमित मीटर रीडिंग लेनी चाहिए, ताकि वे उपभोक्ताओं से कानूनी रूप से सही दर वसूल सकें।

राजेश मित्तल ने आगे कहा कि उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन या पुन: कनेक्शन से पहले पूर्व सूचना प्राप्त करने और नियत प्रक्रिया का पालन करने का अधिकार है, जो निम्नानुसार है:

1. अधिनियम की धारा 56 के तहत भुगतान के चूक से पहले लिखित में न्यूनतम पंद्रह स्पष्ट दिनों का नोटिस प्राप्त करने के लिए।

2. उसके द्वारा दावा की गई राशि के बराबर भुगतान करने के लिए या छह महीने से पहले उसके द्वारा भुगतान की गई बिजली के औसत शुल्क के आधार पर गणना की गई प्रत्येक माह के लिए उससे प्राप्त बिजली शुल्क, जो भी कम हो, किसी का भी लंबित निपटान उसके और वितरण लाइसेंसधारी के बीच विवाद।

3. अधिनियम की धारा 47 के तहत आवश्यक सुरक्षा राशि जमा करने में विफलता के लिए वियोग से पहले लिखित में तीस दिन का नोटिस प्राप्त करना।

4. उपभोक्ता द्वारा वियोग के कारण को हटाने के बाद आपूर्ति प्राप्त करना और प्रदर्शन विनियम के मानकों में निर्धारित अवधि के भीतर राशि का भुगतान करके पुन: कनेक्शन आदेश प्राप्त करना।

5 उन मामलों में पूर्व सूचना का अधिकार उपलब्ध नहीं है जहां उपभोक्ता की स्थापना से अन्य उपभोक्ताओं या बिजली आपूर्तिकर्ता के कर्मचारियों या जनता के स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरा होता है, और ऐसे मामलों में जहां उपभोक्ता चोरी या बिजली के अनधिकृत उपयोग में लिप्त है।

इसी तरह घरों में काम करने वाली एक महिला कविताबाई ने बताया कि उनके घर में दो और दो पंखे के अलावा कुछ भी नहीं है फिरभी इसबार उनका बिल चार हजार रुपए आया है। पिछले महीने जब वह शिकायत करने बिजली ऑफिस गई थी तो उन्हें बताया गया कि इसबार भर दो अगली बार से इतना ज्यादा बिल नहीं आएगा। परंतु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और इसबार और ज्यादा बिल आया है। लोगों का कहना है कि इसकी छानबीन की जानी चाहिए और पता लगाया जाना चाहिए कि कहीं बिजली विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से कोई बड़ा घोटाला तो नहीं हो रहा है। संभावना यह जताई जा रही है कि कुछ लोग बिजली की चोरी कर रहे हैं और इसकी भरपाई गरीबों और सीधेसादे लोगों को करना पड़ रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि स्थानीय नगरसेवकों को चाहिए कि वे इन भुग्तभोगी ग्राहकों के मामले को बिजली ऑफिस में उठाएं और मामले की छानबीन करवाएं अन्यथा ग्राहक अपने हिसाब से फैसला करेंगे।

Please follow and like us:
error

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Please wait...

Subscribe to our Newsletter

To get Notified of our weekly Highlighted News. Enter your email address and name below to be the first to know.
error

Enjoy this blog? Please spread the word :)

Facebook
Twitter
YouTube
Follow by Email