राकपा प्रमुख शरद पवार प्रधानमंत्री बनने को आतुर

राकांपा नेता शरद पवार ने गत मंगलवार को प्रधानमंत्री पद पर नरेंद्र मोदी को दूसरा कार्यकाल नही मिलने की भविष्यवाणी की है राकपा नेता के इस बयान को राजनैतिक हलको में इसे बढ,ती उम्र का तकाजा माना जाये या फिर पूरी नही हो पाने के अपनी  प्रधानमंत्री बनने की अभिलाषा कहे, राकपा प्रमुख अपनी महत्वाकांक्षा बनाये रखना चाहते है और इसी लिए ऐसे बयान जारी करते रहते है जिससे उनके प्रधानमंत्री बनने की सम्भावना बनी रहे.

हलाकि उन्होंने इस लोकसभा चुनाव में भाजपा के सबसे ज्यदा सीट जित कर सबसे बड़ी पार्टी बनने के सच को तो स्वीकार है लेकिन प्रधानमंत्री पद पर नरेन्द्र मोदी के दुबारा बैठने की सम्भावना पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया इशारों इशारी में इस प्रेस वार्ता में राकपा नेता पवार ने आगामी लोकसभा के लिए अपनी मजबूत तैयारी का भी जिक्र किया है.जिसके पीछे उनके प्रधानमंत्री बनने की मंशा को नह्कारा नही जा सकता है.और अनुमान यह भी लगाया जा रहा है की राकपा प्रमुख की इस महत्वाकांक्षा पूर्ति के लिए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे भी उन्हें सीधा समर्थन करने वाले है.अनेक मनसे सूत्र ने इस बात की पुष्टि भी की है की मनसे इस बार लोकसभा चुनाव में नही उतरेगी वो सिर्फ मराठी मानुस को प्रधानमंत्री बनाने के लिए राकपा उम्मीदवारों को खुलकर समर्थन करेगी.

पवार के अनुसार वे 14 और 15 मार्च को दिल्ली में देश भर के कुछ क्षेत्रीय दलों से मिलेंगे, जहां महागठबंधन के आगामी लोकसभा चुनाव में मजबूती से उतरने की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में राकांपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे के फार्मूले को लगभग अंतिम रूप दे दिया गया है और जल्द ही एक आधिकारिक घोषणा की जाएगी। लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला कर चुके पवार की भविष्यवाणी से जहा एक बार फिर राज्यभर के राकपाईयो में जोश भर गया है वही कांग्रेस अपने सहयोगी राकपा प्रमुख के बारे में सोचने को मजबूर हो गयी है

.एक वरिष्ठ कांग्रेसी सूत्र के अनुसार राकपा सुप्रीमो शुरुवात से ही भाजपा के विरोध के प्रति ढुल –मूल रवैया अपनाये रखे है कभी विरोध में बोलते है तो कभी भाजपा के पक्ष में खुल कर आ जाते है.इसीलिए कांग्रेस नेतृत्व भी राकपा से गठबंधन में फूंक फूंक कर कदम रख रही है.दो दिन पूर्व राकपा प्रमुख का भाजपा के बारे में यह बयान देना की लोकसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़े दल बनकर उभरेगी,कांग्रसियो को नागवार गुजरा है.और कांग्रेस और राकपा के गठबंधन और सीटो की घोषणा में हो रही देरी का कारण भी इसे ही माना जारहा है.

गत लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद राकपा ने भाजपा के लिए संजीवनी की भूमिका निभाई थी.राज्य की देवेन्द्र फडणविस के नेतृत्व में बनी सरकार को शुरुवात में शिवसेना ने समर्थन नही दिया था, लेकिन राकपा के शह पर राज्य की भाजपा  सरकार स्थिर भी रही है और शिवसेना कोई मनमानी नही कर पाई.राज्य के साथ देश भर के कांग्रेसियों ने ये माजरा दम साध कर देखा था अभी परिस्थितियों में अनेक बदलाव आने की सोंच कर कांग्रेसी भले ही चैन की सांस ले सकते है लेकिन राकपा छत्रप पवार के राजनैतिक शैली से राज्य के कांग्रेसी ना सिर्फ वाकिफ है, बल्कि भयभीत भी रहते है.ऐसे में गठबंधन कर चुनाव में उतरे और फिर चुनाव बाद राकपा द्वारा भाजपा को ही समर्थन करने से कांग्रेसियों में उहापोह की स्थिति बनी हुई है..

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