राकपा सुप्रीमो को प्रधानमंत्री मोदी ने दिया था साथ आने का प्रस्ताव, बेटी सुप्रिया को केंद्र में मंत्री बनाने की थी तैयारी

उद्धव ठाकरे राज्य के आठवे ऐसे मुख्यमंत्री होंगे, जो शपथ लेते समय किसी सदन के सदस्य नही.केंद्र की ४० हजार करोड़ बचाने, ८० घंटे के लिए मुख्यमंत्री बने देवेन्द्र फडणवीस – भाजपा नेता हेगड़े  राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार ने एक मराठी न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में यह खुलासा किया है कि पिछली दिनों किसानो की समस्या के निदान के विषय पर दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात हुई थी, जिसमे राकपा सुप्रिमो पवार को प्रधानमंत्री मोदी ने ‘‘साथ मिलकर’’ काम करने का प्रस्ताव रखा था. जिसे राकपा सुप्रीमो ने ठुकरा दिया था।

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राकपा सुप्रीमो पवार ने उन खबरों को भी ख़ारिज कर दिया जिसमे मोदी सरकार द्वारा उन्हें देश का राष्ट्रपति बनाने का प्रस्ताव दिया गया था। इसके साथ उन्होंने माना की साथ मिलकर काम करने के प्रस्ताव की स्वीकृति के बाद केंद्र की नरेन्द्र  मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट में उनकी बेटी सुप्रिया (सुले) को मंत्री बनाने का प्रस्ताव उन्हें जरूर मिला था।’’

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राकपा सुप्रीमो पवार ने इस प्रस्ताव पर आगे जानकारी देते हुए बताया की उन्होंने प्रधानमन्त्री मोदी को साफ कर दिया कि उनके लिए प्रधानमंत्री के साथ मिलकर काम करना संभव नहीं है। उनके अनुसार उन्होंने प्रधानमंत्री को यह साफ़ क्र दिया कि हमारे निजी संबंध बहुत अच्छे हैं और वे हमेशा रहेंगे लेकिन मेरे लिए साथ मिलकर काम करना संभव नहीं है।

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राज्य में सरकार गठन को लेकर चल रहे घटनाक्रम के बीच पवार ने पिछले महीने दिल्ली में मोदी से मुलाकात की थी । मोदी कई मौके पर पवार की तारीफ कर चुके हैं। पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में कहा था कि संसदीय नियमों का पालन कैसे किया जाता है इस बारे में सभी दलों को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) से सीखना चाहिए ।

पवार ने कहा कि 28 नवंबर को जब उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो उस समय अजित पवार को शपथ नहीं दिलाने का फैसला ‘सोच समझकर’ लिया गया।

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पवार ने कहा, ‘‘जब मुझे अजित के (देवेंद्र फडणवीस को दिए गए) समर्थन के बारे में पता चला तो सबसे पहले मैंने ठाकरे से संपर्क किया। मैंने उन्हें बताया कि जो हुआ वह ठीक नहीं है और उन्हें भरोसा दिया कि मैं इसे (अजित के बगावत को) दबा दूंगा। उन्होंने कहा, जब राकांपा में सबको पता चला कि अजित के कदम को मेरा समर्थन नहीं है, तो जो पांच-दस (विधायक) उनके (अजित) साथ थे, उनपर दबाव बढ़ गया।’’

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राकांपा प्रमुख ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि (पवार) परिवार में क्या किसी ने (अजित पवार से फडणवीस को समर्थन देने के उनके फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए) बात की थी। लेकिन परिवार के सभी का मानना था कि अजित ने गलत किया। उन्होंने कहा, ‘‘बाद में मैंने अजित पवार से कहा कि जो कुछ भी उन्होंने किया वह क्षम्य नहीं है। जो कोई भी ऐसा करेगा उसे परिणाम भुगतान होगा और आप अपवाद नहीं हैं.

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