राहुल गाँधी देशी या विदेशी ? स्थिति साफ़ होनी चाहिए
(कर्ण हिन्दुस्तानी )
आखिरकार देश की राजनीती में वह पल भी आ ही गया जिसको लेकर कई सालों तक असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी जिस बात को लेकर विगत कई सालों से राजनीतिक और गैर राजनीतिक मंचों पर बात कर रहे थे। वह मुद्दा अब पहली बार खुलकर सामने आया है।
इन दिनों कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की नागरिकता से जुड़ा यह मुद्दा अब सबकी जुबां पर है। राहुल गाँधी के उपनाम को लेकर तो हंगामा होता ही आया है अब नागरिकता पर भी ऊँगली उठने लगी है। इस मामले में स्वामी का कहना है की २००३ में ब्रिटैन में एक कम्पनी का पंजीकरण किया गया था और राहुल गाँधी इस कम्पनी के निदेशक थे। इस कम्पनी में राहुल गाँधी ने खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया है।
इससे पहले भी राहुल गाँधी के पास दो पासपोर्ट होने की बातें भी राजनीती की सुर्खियां बन चुकीं हैं। सवाल यह बनता है की यदि राहुल गाँधी के पास ब्रिटैन की नागरिकता है तो वह भारत की जनता के साथ इतने सालों से झूठ क्यों बोलते रहे हैं की वह भारतीय नागरिक हैं। यदि स्वामी के आरोप बेबुनियाद हैं तो राहुल गाँधी स्वामी के खिलाफ अदालत का दरवाज़ा क्यों नहीं खटखटाते ?
राहुल गाँधी के ऊपर लग रहे आरोपों का कांग्रेस की तरफ से खंडन कर देने मात्र से बात नहीं बनेगी। कांग्रेस को जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी ही होगी। किसी भी विदेशी नागरिकता प्राप्त नागरिक को हमारी संसद में बैठने का कोई अधिकार नहीं है। देश को गुमराह करना भयंकर अपराध है। फिर चाहे वह सुब्रमण्यम स्वामी हों या फिर राहुल गाँधी हों। मुद्दा यह भी है कि कांग्रेस ने इतने सालों तक यह बात किस वजह से छुपा कर रखी थी ? क्या कांग्रेस में देश से स्नेह रखने वालों की कमी है ? यदि ऐसा नहीं है तो राहुल गाँधी की नागरिकता के मुद्दे पर कांग्रेस का बड़ा तबका शांत क्यों है ?

