विद्यार्थी परिषद मुंबई के काम के नींव के पत्थर रहे ज्येष्ठ कार्यकर्ता रविन्द्र तुकाराम पवार अब नहीं रहे।

 

विद्यार्थी परिषद मुंबई के काम के नींव के पत्थर रहे ज्येष्ठ कार्यकर्ता रविन्द्र तुकाराम पवार अब नहीं रहे।

कल दिनांक ९ अगस्त २०१८ सायं 7.57 बजे प्रभादेवी, मुंबई में उन के निवासस्थान पर उनका दुःखद निधन हुआ।

सत्तर के दशक में आपने अभाविप का काम प्रारंभ किया। मुंबई के कीर्ति कॉलेज से B.Sc. कि शिक्षा पूर्ण की।

१९६७_६८ में मुंबई अभाविप के आप मंत्री रहे तथा पूर्ण कालिक कार्यकर्ता रहे। तत्पश्चात् महाराष्ट्र के प्रांत मंत्री भी रहे। १९७५ के आपात्काल के विरुद्ध छात्रोंके सत्याग्रह का नेतृत्व हो या भूमिगत रहते हुए संघर्ष का संचालन हो आप के संगठन कौशल का वह परिचय ही था।

मुंबई के गिरणगाव परिसर, जैसे लालबाग, परल, शिवडी के अनेक कार्यकर्ताओं को आपने जोड़ा। प्रदीप राणे, चंदू चव्हाण,अशोक शिंदे, विष्णू बोबडे ऐसे अनेक कार्यकर्ताओं ने अभाविप में तो
जबरदस्त काम किया ही लेकिन आपकी ही मित्रता से वे सभी लंबे समय तक बीएमएस, रा. स्व.सं. एवं सहकार भारती में सक्रिय रहे।

“नवाचार” ये आपकी विशेषता रही। किसी भी कार्यक्रम हेतु स्वागत समिति बनाना ये अभाविप में नया नहीं लेकिन “विद्यार्थियों की स्वागत समिति” बनाना ये आपकी कल्पना।१९६९ में कॉलेजों से चुने हुए छात्रसंघ अध्यक्षों को ५/- रू. लेकर स्वागत समिति सदस्य बनाना ये नवाचार आपने किया।

१९७५ के आपात्काल के पश्चात आप रा.स्व.संघ के मुंबई महानगर के सहकार्यवाह रहे और कोकण प्रांतरचना के बाद दीर्घकाल प्रांत सहकार्यवाह रहे।

कीर्ती महाविद्यालय के आप चेअरमन रहे। रा. स्व.सं. का कार्यालय “यशवंत भवन” आपके ही अथक प्रयास से बना।

ऐसे रवींद्रजी, दीर्घकाल अपने स्मरण में रहेंगे और प्रेरणा देते रहेंगे।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर उन्हे सद्गती प्रदान करे यही अभाविप की
विनम्र श्रद्धांजली.

विद्यार्थी परिषद मुंबई के काम के नींव के पत्थर रहे ज्येष्ठ कार्यकर्ता  रविन्द्र तुकाराम पवार अब नहीं रहे।

कल दिनांक ९ अगस्त २०१८ सायं 7.57 बजे प्रभादेवी, मुंबई में उन के निवासस्थान पर उनका दुःखद निधन हुआ।

सत्तर के दशक में आपने अभाविप का काम प्रारंभ किया। मुंबई के कीर्ति कॉलेज से B.Sc. कि शिक्षा पूर्ण की।

१९६७_६८ में मुंबई अभाविप के आप मंत्री रहे तथा पूर्ण कालिक कार्यकर्ता रहे। तत्पश्चात् महाराष्ट्र के प्रांत मंत्री भी रहे। १९७५ के आपात्काल के विरुद्ध छात्रोंके सत्याग्रह का नेतृत्व हो या भूमिगत रहते हुए संघर्ष का संचालन हो आप के संगठन कौशल का वह परिचय ही था।

मुंबई के गिरणगाव परिसर, जैसे लालबाग, परल, शिवडी के अनेक कार्यकर्ताओं को आपने जोड़ा। प्रदीप राणे, चंदू चव्हाण,अशोक शिंदे, विष्णू बोबडे ऐसे अनेक कार्यकर्ताओं ने अभाविप में तो
जबरदस्त काम किया ही लेकिन आपकी ही मित्रता से वे सभी लंबे समय तक बीएमएस, रा. स्व.सं. एवं सहकार भारती में सक्रिय रहे।

“नवाचार” ये आपकी विशेषता रही। किसी भी कार्यक्रम हेतु स्वागत समिति बनाना ये अभाविप में नया नहीं लेकिन “विद्यार्थियों की स्वागत समिति” बनाना ये आपकी कल्पना।१९६९ में कॉलेजों से चुने हुए छात्रसंघ अध्यक्षों को ५/- रू. लेकर स्वागत समिति सदस्य बनाना ये नवाचार आपने किया।

१९७५ के आपात्काल के पश्चात आप रा.स्व.संघ के मुंबई महानगर के सहकार्यवाह रहे और कोकण प्रांतरचना के बाद दीर्घकाल प्रांत सहकार्यवाह रहे।

कीर्ती महाविद्यालय के आप चेअरमन रहे। रा. स्व.सं. का कार्यालय “यशवंत भवन” आपके ही अथक प्रयास से बना।

ऐसे रवींद्रजी, दीर्घकाल अपने स्मरण में रहेंगे और प्रेरणा देते रहेंगे।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर उन्हे सद्गती प्रदान करे यही अभाविप की
विनम्र श्रद्धांजली.

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