केंद्र सरकार के विरुद्ध आविश्वास प्रस्ताव में शिवसेना विरोधी भूमिका ले सकती है !!

केंद्र की मोदी सरकार की पूर्व सहयोगी रही तेलुगू देशम पार्टी द्वारा लोकसभा में केंद्र सरकार के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर शुक्रवार को चर्चा के बाद मतदान होंगे.इस अविश्वास प्रस्ताव पर कांग्रेस जहां अति उत्साहित नजर आ रही है वही मोदी सरकार के एक और सहयोगी दल शिवसेना द्वारा इस अविश्वास प्रस्ताव के विरोध में मतदान करने की पूरी संभावना है,बावजूद इन सबके इस अविश्वास प्रस्ताव से केंद्र की मोदी सरकार को कोई खतरा नही है क्योकि उसके पास आवश्यक संख्या बल है.

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस क्यों अति उत्साहित है यह आम लोगों के समझ से परे हैं और इस अविश्वास प्रस्ताव के बाद जहां अनेक क्षेत्रीय दल अपने अपने राज्य में अपने आप को मजबूत और राज्य की जनता केहितैषी दिखाने में कामयाब होंगे वही कांग्रेस इन राज्यों से पूरी तरह से दरकिनार दिखेगी

ज्ञात हो की विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ दल तेलुगू देशम पार्टी पिछले दिनों ही केंद्र सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था अब लोकसभा के मानसून सत्र के पहले दिन ही इसी दल ने केंद्र सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाया. जिसे लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने स्वीकृति दे दी इस पर चर्चा शुक्रवार को होगी

केंद्र सरकार के पास आवश्यक संख्या से अधिक सांसद होने के कारण मोदी सरकार को कोई खतरा नहीं है लेकिन इसी बहाने भारतीय जनता पार्टी अपने देश से कांग्रेस मुक्त करने के एजेंडे पर एक और सफल कदम चलेगी आगामी कुछ ही दिनों में केंद्र के साथ अनेक राज्यों में चुनाव होने हैं और अपने समर्थकों को संजीवनी देने के लिए चाहे आंध्रप्रदेश की तेदपा हो फिर बंगाल की ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस हो या फिर महाराष्ट्र की शिवसेना हो हरदल अपने अपने समर्थकों में अपनी पैठ बरकरार करने के रखने के लिए इन एजेंडों पर काम करते रहते हैं और केंद्र के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव उसी का एक रुप है

लेकिन आश्चर्यजनक रूप से कांग्रेस केंद्र सरकार के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को अपनी बड़ी जीत मान रही है ज्ञात हो कि पिछले दिनों ही कर्नाटक में कांग्रेस समर्थित सरकार के गठन के दौरान देशभर के केंद्र की मोदी विरोधी राजनीतिक दल जमा हुए थे और इस जमावड़े ने आगामी लोकसभा चुनाव एकजुट होकर लड़ने की गवाही दी थी लेकिन इसके कुछ ही दिन बाद बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने अलग रूप अपना लिया वही उत्तर प्रदेश के ही समाजवादी पार्टी के युवा मुखिया अखिलेश यादव ने भी आगामी लोकसभा चुनाव कांग्रेस के बिना ज्यादा हस्तक्षेप के लड़ने की घोषणा कर दी तृणमूल कांग्रेस के बाद तेलुगू देशम पार्टी भी कांग्रेस को अपने राज्य में पांव पसारने नहीं दे रही है

अब अविश्वास प्रस्ताव लाकर तेदपा अपने राज्य में अपने दल को और मजबूती देने का काम करेंगे वहि कल के अविश्वास प्रस्ताव में इस बात की पूरी संभावना है कि शिवसेना या फिर बिहार में सत्ता में सहयोगी जनता दल यूनाइटेड  भी केंद्र सरकार के विरोध में मतदान करें इससे आवश्यक संख्याबल होने के कारण जहां केंद्र की मोदी सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ेगा वही ये प्रदेशिक दल अपने अपने राज्य में अपनी पैंठ और मजबूत कर लेंगे

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