नही हुआ है शिवसेना का एनडीए से मोहभंग

राज्य में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सहयोग से सत्ता स्थापित करने के लिए लगातार प्रयासरत शिवसेना का एन डी ए से भी मोह खत्म नही हुआ है और कल जब केन्द्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने पत्रकारों के शिवसेना पर प्रश्न पूछे जाने पर यह साफ़ कर दिया था की शिवसेना एन डी ए का हिस्सा नही रही. उनके सांसद सदस्यों के बैठने के लिए संसद में अलग से व्यवस्था होगी

संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी के इस बयान पर आज शिवसेना के मुख्यपत्र सामना में करारा विरोध दर्ज किया गया है. मुख्यपत्र सामना के अनुसार शिवसेना एनडीए के फाउंडर सदस्यों में से एक हैं। एनडीए बनाने वाले पांच नेता थे अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण अडवाणी, जॉर्ज फर्नांडिस, प्रकाश सिंह बादल और बाला साहेब ठाकरे.

मुख्यपत्र के अनुसार हमने एनडीए को बनाया है। हमने बार-बार एनडीए को मजबूत करने की कोशिश की है। एक समय ऐसा भी आया था जब इसमें दो-तीन लोग ही बचे थे लेकिन शिवसेना एनडीए के साथ थी. कितने मोड आए लेकिन शिवसेना ने एनडीए को छोड़ा नहीं। आज भाजपा को लगता है कि हम भगवान है और हम सबकुछ कर सकते हैं। और शिवसेना को एनडीए से बाहर निकालने की बात करते है तो उन्हें मालुम होना चाहिए कि वे भगवान नहीं है।

मुख्यपत्र के अनुसार लोकजनशक्ति पार्टी के प्रमुख चिराग पासवान और रामविलास पासवान के साथ शिवसेना काम कर चुकी है। बात महाराष्ट्र से निकलकर दिल्ली तक आ गई है राजनीति में शब्द का और वचन का महत्व होता है लेकिन आज शिवसेना को बाहर निकालने की बात कर रहे हैं।

एनडीए किसी की निजी प्रॉपर्टी नहीं है। एक पार्टी जो हमेशा आपके साथ रही उसे आपने निकाल दिया। शिवसेना को कोई चिट्ठी नहीं भेजी आपको निकालने जा रहे हैं और ना प्रकाश सिंह बादल और ना नीतीश कुमार से पूछा कि शिवसेना को एनडीए से निकाला जा रहा है।

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