थप्पड़ संस्कृति का विरोध होना ज़रूरी। 

( कर्ण हिन्दुस्तानी )
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को आज किसी ने प्रचार रैली के दौरान जोरदार थप्पड़ मार दिया। यह थप्पड़ इतना जोरदार था कि केजरीवाल जीप से गिरते गिरते बच गए। देश की राजनीती में यह थप्पड़ संस्कृति अपने आप में घातक साबित होती जा रही है। एक समय था जब नेताओं को भरी सभा में जूता मारने की घटनाओं में वृद्धि हुई थी।
अब थप्पड़ मारने की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि होती दिख रही है।  एक समय में शरद पवार को भी किसी ने थप्पड़ मारा था , कन्हैया को भी थप्पड़ पड़ चुका है।  अरविन्द केजरीवाल तो थप्पड़ खाने के लिए मशहूर हो गए हैं। मगर सवाल यह उठता है कि आखिर जनता में इतना आक्रोश कैसे पैदा हो गया है कि वह कभी तो देश के कृषि मंत्री को थप्पड़ मार देता है और कभी मुख्यमंत्री को थप्पड़ मार देता है। इन घटनाओं को यदि गंभीरता से ना लिया गया तो भविष्य में यह थप्पड़ संस्कृति भष्मासुर बनकर सामने खड़ी होगी।
ऐसे मामलों में क़ानून में विशेष बदलाव की यदि आवश्यकता हो तो वह भी करना समय की मांग है। साथ ही साथ घटना के समय मौजूद सुरक्षाकर्मियों पर भी विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि यह थप्पड़ किसी पडोसी ने पडोसी को नहीं मारा है , यह थप्पड़ देश की राजधानी के मुख्यमंत्री को मारा गया है। जो कि संवैधानिक तरीके से निर्वाचित होकर मुख्यमंत्री बना है। दलगत राजनीती को किनारे रख कर ऐसे मामलों को संज्ञान में लेना होगा। नहीं तो आने वाले समय में इस तरह की घटना का कोई भी शिकार हो सकता है।
Please follow and like us:
error

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error

Enjoy this blog? Please spread the word :)

Facebook
Twitter
YouTube
Follow by Email