भारत की आज़ादी का कड़वा सच – (भाग – ६७ ) सिखों ने लिया अपने परिजनों के कत्ल का बदला।

 (कर्ण हिंदुस्तानी )
पंद्रह अगस्त १९४७ की सुबह अमृतसर में मुस्लिमों और सिखों में जमकर मारकाट शुरू हो गई। सिखों ने अमृतसर के आसपास के क्षेत्रों में घुसकर मुस्लिमों का कत्ल ए आम कर दिया। इसकी वजह यह थी कि पाकिस्तान में उनके परिजनों को मुस्लिम संगठनों ने मार दिया था। बदले की चिंगारी अब आग का दरिया बन कर सभी को अपनी आगोश में ले रही थी। दुसरी ओर लाहौर में मुस्लिमों ने हिन्दुओं और सिखों पर समूह बनाकर हमला किया और इस हमले में मुस्लिम पुलिस वालों ने भी कत्ले आम में जमकर हिस्सा लिया। शरणार्थियों से भरी ट्रेन बेदर्दी से जला दी गई।  ट्रेन में सवार सभी लोग पल भर में राख बन गए। जो बचे थे उनको भागने का कोई भी मौक़ा नहीं दिया गया।
पांच नदियों को अपने दामन में समेटने वाले पंजाब का आसमान धुंए से काला हो गया था।  सड़ी गली लाशों पर गिद्धों की नज़र पड़ने लगी थी। गिद्धों ने जमकर इंसानी मांस का सेवन किया। दुसरी तरफ गाँधी ने बंगाल के स्वाधीनता दिन पर एक दिवसीय व्रत रखा। कलकत्ता में १५ – १६ अगस्त को व्यापारिक प्रतिष्ठानों सहित सभी छोटे बड़े व्यवसाय भय की वजह से बंद पड़े थे। गांधी ने दंगों को रोकने के लिए और दोनों समुदायों के बीच पैदा हुई दरार को कम करने के मकसद से आमरण अनशन शुरू कर दिया। मगर इस आमरण अनशन का कोई भी असर नहीं हुआ और आपसी मतभेद जस के तस ही रहे। जिन्नाह भी अब दंगों की खबरों से रूबरू होने लगे थे।
२४ अगस्त १९४७ वाले दिन पहली बार जिन्नाह का बयान अखबारों में प्रकाशित हुआ।  जिन्नाह ने कहा कि पूर्वी बंगाल में मुसलमानों पर हो रहे ज़ुल्म की खबरों ने मुझे निजी तौर पर आहत किया है। जिन्नाह ने शान्ति की अपील करते हुए कहा , दंगा प्रभावित क्षेत्रों में से मुस्लिमों को बचाकर लाने के सम्पूर्ण प्रयास किये जाएंगे। एक जगह जिन्नाह ने कहा कि कराची की जनता ठंडे दिमाग से काम ले रही है जिसका मुझे गर्व है। लाहौर में हिन्दुस्तान से विस्थापित होकर आने वाले शरणार्थियों का तांता लगा हुआ था। यही हालात दिल्ली और पंजाब के भी थे। थक कर टूट  चुके लोग अब अपनी ज़रूरतें पूरी करने के संसाधन तलाश करने में लगने लगे थे। हर जगह इतनी लाशें पड़ी हुईं थीं कि लोग लाशों के बीच से ही गुजरते हुए बाज़ार आ जा रहे थे।  बरसात की वजह से लाशें सड़ने लगीं थीं और हालात यह बन गए थे कि पीने के पानी में भी कीड़े दिखने शुरू हो गए थे।
(जारी ……)
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