मोदी विरोध आखिर किस हद तक और क्यों ?

(कर्ण हिन्दुस्तानी )
जैसे -जैसे लोकसभा चुनाव नज़दीक आते जा रहे हैं वैसे – वैसे विपक्षी पार्टियां मोदी जी का विरोध अभियान तेज़ करती जा रहीं हैं। मोदी विरोध में अंधी हुई विपक्षी पार्टियां देश हित को भी भूलती जा रही हैं। यहां तक कि देश की सैन्य शक्ति को भी राजनीती में घसीटने का घिनौना कार्य किया जा रहा है। कोई सांसद यदि फौजी वर्दी में जनता के बीच जाकर खड़ा होता है तो भी विपक्षी दलों के पेट में मरोड़ उठने लगते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यदि माथे पर तिलक लगा लेते हैं तो भी इन विपक्षियों को परेशानी हो जाती है।  जिस नीरव मोदी, विजय माल्या  और सुशिल मोदी को कांग्रेस के राज में आर्थिक मदद की गई थी और  खुले आम घूमने की आज़ादी भी प्रदान की गई थी।  मोदी सरकार के सत्तासीन होने के बाद इन तीनों पर जब शिकंजा कसा गया तो यह जान बचाने की खातिर देश से भाग गए तो इनके भागने का ठीकरा भी मोदी पर ही फोड़ा गया।
मोदी ने खुद को देश का चौकीदार कहा तो विपक्षियों ने चौकीदार चोर का राग अलापना शुरू कर दिया।  जबकि अभी तक कांग्रेस और उसके पिल्लै राजा बनकर जनता की दौलत को लूट रहे थे।  मोदी के प्रधानमंत्री बनने के पश्चात ऐसे लोगों को लूटने का मौक़ा नहीं मिला और इन्होने मोदी को ही घेरने का प्लान बना दिया। पुलवामा के आतंकी हमले के बाद तो बेशर्मी की पराकाष्ठा लांघते हुए विपक्षी दलों ने सेना के पराक्रम  पर ही ऊँगली उठानी शुरू कर दी।
सर्जिकल स्ट्राइक को ही बगास साबित करने पर विपक्ष उतर आया।  क्या यही राजनीती है ? आखिर मोदी का विरोध  क्यों  हो  रहा  है ? क्योंकि ना जीजा को – ना ही साले को मनमानी करने दी जा रही है। सैनिकों को बुलेट प्रूफ जैकेट देने पर भी इनका विरोध है।  इनके कार्यकाल में राफेल सौदा लटका रहा क्योंकि इनकी दलाली इन्हें नहीं मिल रही  थी।
अब जब मोदी सरकार  ने  सौदा  कर विमान मंगाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया तो विपक्ष और ख़ास कर कांग्रेस के पेट में किसी गर्भवती महिला की तरह दर्द होने लगा।  जिस राहुल गांधी को लेकर कांग्रेस उछल रही है उस राहुल गाँधी को कितनी अक्ल है यह इस बात से भी पता  चल जाता है कि संसद में प्रधान मंत्री के आसन तक ऐसे ही नहीं जाया जाता।  उसके कुछ नियम हैं।  संसद में आँख मारने की लज्जास्पद घटना किसको भूली है।modi का विरोध करना है तो शौंक से कीजिये मगर कुछ तथ्य तो होना चाहिए आपकी बात में।
आखिर कब तक यह कमर के नीचे की राजनीती विपक्ष खेलता रहेगा। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल में एक से बढ़कर एक घोटाले हुए मगर मनमोहन सिंह की नियत के बारे में तात्कालिक विपक्ष ने कभी शक नहीं किया।  क्योंकि विपक्ष को पता था कि मनमोहन सिंह ईमानदार हैं , यदि कोई बे ईमान है तो गाँधी परिवार है।  कांग्रेस के राज में लूट मची थी। इस लूट को रोकने का सफल कार्य मोदी सरकार  ने किया है. तो फिर हंगामा क्यों किया जा रहा है। विपक्ष के इस हंगामे की वजह से विपक्ष कमज़ोर हो रहा है।  महागठबंधन बिखर चुका है। आज का युवा मतदाता सब देख रहा है aur आने वाले लोकसभा चुनावों में वह देश को सही राह दिखाएगा।
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