दो राज्यों के विधानसभा चुनाव और विलुप्त होती कांग्रेस !

(कर्ण हिन्दुस्तानी )
किसी समय देश के राजनीतिक शिखर पर अपना डंका बजाने वाली कांग्रेस आज विलुप्त होती नजर आ रही है। हरियाणा और महाराष्ट्र में विधान सभा चुनाव हैं मगर किसी भी कोंग्रेसी नेता का कोई भी बड़ा बयान देखने या फिर सुनने को नहीं मिला है।  कांग्रेस के युवराज विदेश में घूम रहे हैं और कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी भी कुछ ख़ास दिलचस्पी लेते नहीं दिख रही हैं।

महाराष्ट्र में  कांग्रेस की हालत यह है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को कांग्रेस में विलय करने की बात करने लगे हैं।  यानी कि अब कांग्रेस शरद पवार की लंगोटी पकड़ कर अपना अस्तित्व बचाने में लग गयी है.

एक समय देश में सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में दशकों तक राज करने वाली कांग्रेस की यह हालत होगी ऐसा किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा।  इन दोनों राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के कई दिग्गज नेता पार्टी की नीतियों का विरोध करते हुए या तो दुसरी राजनीतिक पार्टी में चले गए हैं या फिर चुनाव प्रचार से किनारा करने की घोषणा कर चुकें हैं।  महाराष्ट्र की बात करें तो संजय निरुपम और मिलिंद देवड़ा जैसे मंझे हुए कोंग्रेसी चुनाव प्रचार से दूर हैं।

कृपाशंकर सिंह कांग्रेस छोड़ चुकें हैं। कांग्रेस ने इन विधानसभा चुनाव में ऐसे लोगों को टिकिट दिया है जो अपनी पार्टी के सामान्य कार्यकर्ताओं  नहीं पहचानते। पार्टी  शीर्ष नेताओं को अब अपनी उम्र का भी एहसास हो गया है। वह कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में कांग्रेस के बारे में यदि यह कहा कि कांग्रेस दोनों राज्यों में अपनी हार कबूल कर चुकी है तो  अतिश्योक्ति नहीं होगी।

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