केरल और मंदसौर की घटना के बाद कहाँ मर गया मोमबत्ती गिरोह ?

कर्ण हिन्दुस्तानी

गत दो तीन दिनों में हिन्दुस्तान की पवित्र धरती पर दो घटनाएं हुईं , दोनों घटनाओं से मानवता शर्मसार हुई और अगर कोई शर्मसार नहीं हुआ तो हिन्दुस्तान का वह तबका शर्मसार नहीं हुआ जो बलात्कार की घटनाओं को भी धर्म की आड़ में लेकर राजनीती करने से बाज़ नहीं आता है .

पहली घटना में केरल के एक कैथलिक चर्च के बिशप पर एक नन ने बलात्कार का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज़ करवाई है .जबकि दुसरी घटना में मंदसौर में दो मुस्लिम युवकों ने सात साल की मासूम छात्रा के निकाह के लिए ना कहने पर उसके साथ ना सिर्फ दुष्कर्म किया बल्कि दुष्कर्म करने के पश्चात छात्रा को मारने के मकसद से उसके नाज़ुक अंगों सहित शरीर पर घातक हथियारों से कई वार भी किये .

दोनों घटनाओं ने देश की सामान्य जनता को तो हिलाकर रख दिया मगर हर बार ऐसी घटनाओं के पश्चात मोमबत्ती लेकर निकलने वाला गिरोह इस बार चुप है .किसी भी डंडा पकडू चैनेल पर कोई भी पत्रकार या तथाकथित बुद्धिजीवी विलाप करते हुए नहीं दिखे .क्योंकि बिशप पर जो आरोप लगाए गये हैं वह एक नन ने लगाये हैं और मंदसौर में बच्ची के साथ बलात्कार करने वालों का नाम इरफ़ान और आसिफ है .बलात्कार की शिकार मासूम बच्ची हिन्दू है , इसी वजह से किसी के मन में कोई टीस नहीं उठी .

क्या अब हिन्दुस्तान में हिन्दू बच्चियों के साथ बलात्कार को गुनाह नहीं माना जाएगा ?

कहाँ हैं बरखा दत्त ?

कहाँ हैं जावेद अख्तर ?

कहाँ हैं वह सभी लोग जिन्होंने एक मुस्लिम लड़की के साथ हुए कथित बलात्कार के बाद पूरा देश सर पर उठा रखा था ?

केरल का बलात्कार का आरोपी बिशप पादरी

केरल के चर्च के बिशप के खिलाफ कोई क्यों नहीं बोलता है जिसने नन के साथ एक बार नहीं तेरह बार दुष्कर्म किया .नन केथ्लिक समाज के पास न्याय की गुहार लगाते लगाते थक गयी . मगर उसे न्याय नहीं मिला .आखिरकार नन ने हिम्मत कर पुलिस में शिकायत की .

क्या इसाई मिशनरियां हिन्दुस्तान में यही सब करने के लिए अपना जाल बिछा रही हैं ?

क्या इसाई धर्म में अब साध्वियां भी सुरक्षित नहीं हैं ?

या फिर यही सब करने के लिए चर्च के सर्वेसर्वा युवा या फिर नाबालिग लड़कियों को नन बनने के लिए प्रेरित करते हैं ?

 क्या धर्म की आड़ में अधर्म का खेल खेलना ही इसाई धर्म गुरुओं का काम है ?

क्यों नहीं सरकार और इसाई धर्म के प्रचारक ऐसे बिशप को कड़ी सजा देने का ऐलान करते हैं ?

क्या यही है इसाई धर्म की असलियत ?

धर्मांतरण के साथ साथ हैवानियत का खेल खेलने वाले ऐसे बिशप के खिलाफ क्या आगे नहीं आना चाहिए ?

इस सवाल का जवाब हाँ चाहिए , मगर कौन करेगा यह हाँ ?

क्योंकि देश के प्रमुख विपक्षी दल इस घिनौने कृत्य में भी वोटों की राजनीती करने से बाज़ नहीं आते हैं . ऐसे में कुछ नहीं हो सकता .

मंदसौर की घटना का जिक्र करें तो इस घटना के प्रमुख आरोपी  इरफ़ान और आसिफ नामक दो युवकों ने सात साल की स्कूली छात्रा के साथ सिर्फ इसलिए बलात्कार किया क्योंकि उसने इरफ़ान से निकाह करने से इनकार कर दिया था .ये बाते इन दोनों ने पुलिस को दिए अपने बयाँन में कही है,इन दोनों मुस्लिम युवकों ने यह भी नहीं सोचा कि उस मासूम को निकाह का मतलब क्या होता है यह तक नहीं पता .

दोनों मुस्लिम  युवकों को यकीन था कि वह जो कार्य करने जा रहे हैं भले ही वह जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है मगर वह दोनों मुस्लिम हैं ,उनको बचाने और इस्लाम खतरे में है का बहाना बनाकर दोनों की वकालत करने के लिए कई सन्गठन खड़े हो जाएंगे .कुछ तो आधी रात को अदालत का दरवाज़ा भी खुलवा लेंगे . ऐसे में कुछ भी करो कोई फर्क नहीं पड़ता .यह एक कडवी सच्चाई है कि हिन्दुस्तान में हिन्दुओं की बच्चियां और माँ बहने सुरक्षित नहीं हैं .

 

मंदसौर के नाबालिग का बलात्कारी आरोपी

इसाई धर्मावलम्बियों और मुस्लिम समुदाय के लोग कभी भी कुछ भी करने को आज़ाद हैं .यदि यही हाल रहा तो एक दिन इन सबकी ज्यादतियों से तंग आकर हिन्दू समाज उठ खड़ा होगा और फिर जो जंग होगी उसको संभालने की ताक़त किसी में भी नहीं होगी .ऐसे दुराचारियों को बीच सड़क पर फांसी देने से भी समाज पीछे नहीं हटेगा .

Keral Nun Rape & Mandsour Miner Rape,की घटना के बाद कहाँ मर गया मोमबत्ती गिरोह ??
https://youtu.be/JJruZMyDQts
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