धार्मिक ग्रन्थ गीता पर हंगामा क्यों ?क्या शिक्षा संस्थानों में इसाईत और इस्लाम का ही प्रचार होगा ?

भक्ति वेदांत ट्रस्ट भिवंडी द्वारा महाराष्ट्र भर के ए और ए प्लस श्रेणी के महाविद्यालय में पवित्र ग्रंथ गीता बांटे जाने पर आज महाराष्ट्र विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ विरोधी दल कांग्रेस,राष्ट्रवादी कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जहां इसे राज्य में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना पर अपना हिंदूवादी एजेंडा महाविद्यालय के छात्रों पर लागू करने का आरोप लगा रहे है वही राज्य सरकार में शिक्षा मंत्री विनोद तावडे ने इसे सरकार की तरफ से नहीं बाटे जाने की सफाई दी है और भिवंडी के भक्ति वेदांत ट्रस्ट द्वारा महाविद्यालयों में गीता बांटे जाने की बात कही है, हालांकि उन्होंने विरोधी दल से यह भी सवाल किया की गीता बाटा जाना गलत है क्या ? उन्होंने ये भी ऐक्छिक होने की बात कही.

उल्लेखनीय है कि इसी विषय पर आज शिक्षा मंत्री तावडे ने पत्रकार परिषद लेकर इस बारे में पूरा विवरण पेश किया उनके अनुसार भक्ति वेदांत ट्रस्ट  ने उनसे संपर्क करके राज्य सरकार द्वारा यहां के महाविद्यालय में पवित्र ग्रंथ गीता बांटे जाने की मांग का पत्र दिया था इस पर शिक्षा मंत्री तावड़े ने साफ शब्दों में राज्य सरकार के खर्चे पर यह  संभव नहीं होने की बात कही इसके साथ उन्होंने उसी संस्था को सुझाव दिया की अगर आपकी संस्था अपने खर्चे पर यह करना चाहती है तो ठीक है तावडे के अनुसार इस संस्था को राज्य के महाविधालय की सूचि दी गयी है.

इसी मुद्दे पर राज्य में विरोधी दल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी के नेतागन सत्ताधारी दल पर चौतरफा हमला कर रहे है.विरोधी दल के अनुसार सत्ताधरी भाजपा शिवसेना अपना हिंदूवादी एजेंडा लोगो पर थोप रही है.इन विरोधी दल के नेताओं को गीता से इतना परहेज क्यों है ये समझ से परे है लेकिन एक नजर अगर हम कांग्रेसी राज में विधालयो में धर्म के प्रचार की बात करे तो देश भर के छात्रों के पाठ्यक्रम के किताबो से हिन्दू धर्म सम्बंधित पाठ एक योजनावध ढंग से दूर कर दिया गया है जबकि इसाईत और इस्लामिक शिक्षण संस्थाओ को अपने धर्म प्रचार की खुली छुट दे दी गयी,जो अभी तक जारी है.

आइये अव एक नजर डालते है मशीनरी और इस्लामिक संस्थाओ द्वारा संचालित शिक्षण संस्थाओ में  हिन्दू व् अन्य धर्म के छात्रो के साथ क्या होता है. ??बात करते है देश के महानगरो में शुमार महानगर मुम्बई और इसके आसपास के उपनगरो  में इसाई मशीनरी द्वारा संचालित शिक्षण संस्थाओ की.

१)अंग्रेजी और मॉडर्न शिक्षा के नाम पर यहाँ पूरी तरह से इसाई धर्म का प्रचार होता है.

२)यहा के छात्रो को सुबह से शाम तक छात्रो को इसाई धर्म की प्रार्थना और ईसा मसीह का गुणगान करवाया जाता है.मुम्बई से सटे उपनगर डोम्बिवली के प्रसिद्ध कान्वेंट स्कूल सेंट टेरेसा  में तो हर पीरियड में मशीनरी टीचर छात्रो से क्लास शुरु होने के पहले इसाई धर्म की अलग अलग प्रार्थना करवाती है,

3)डोम्बिवली के ही एक और प्रसिद्ध कान्वेंट स्कूल सेंट मेर्री की बस रविवार को मुफ्त में अलग अलग जगहों से इसाई धर्म के लोगो को चर्च में प्रार्थना के लिए लाती और ले जाती है.

४)ये बाते तो स्कूल की हो गयी अब मुम्बई के प्रसिद्ध डॉन बोस्को स्कूल व् कॉलेज की बात करते है यहाँ कॉलेज कैपस में ही इसाई धर्म के मॉस प्रेयेर का आयोजन किया जाता है और इस प्रेयर में इनजीनियरिंग और बेटेक तक के छात्रो को  शामिल होने के लिए तरह तरह के प्रलोभन दिये जाते  है 

५)इन शिक्षण संस्थाओ का वार्षिक सम्मेलन के साथ हर सामूहिक प्रोग्राम सिर्फ और सिर्फ अपने धर्म का प्रचार करता है.

अब बात करते है मुम्बई के सबसे प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्थान द्वारा संचालित इस्माइल युसूफ कॉलेज की,इस कॉलेज में रहने की  हॉस्टल व्यवस्था होने के कारण राज्य भर से सभी धर्मो के लोग यहाँ प्रवेश लेते है.

१) जोगेश्वरी में ५४ एकड़ में फैले इस कॉलेज में ही मस्जिद भी है जहा बाहर से भी लोग बड़ी संख्या में  पाचो बक्त नमाज पढने आते है,

२)  कॉलेज प्रशासन अपने कॉलेज का लेक्चर भी नमाज के बक्त नही रखते है और

3) किसी दिन लेक्चर के दौरान ही नमाज शुरू हो गई तो मुस्लिम छात्रो को खुली छुट रहती है की वे बिना शिक्षक के आज्ञा लिए क्लास से निकल कर नमाज पढने जा सकते है.

४) इनके एनुअल फंक्शन का रंग को भले ही इस्लामिक रंग ना मिला हो लेकिन शाम की नमाज के लिए चलते वार्षिक उत्सव के माइक को पूरी तरह बंद कर दिया जाता है

ऐसे में हिंदू बहुल हिंदुस्तान में धार्मिक संस्था भक्ति वेदांत ट्रस्ट द्वारा यहां के महाविद्यालय में हिन्दू छात्रो को गीता बाटा जाना वह भी ऐक्छिक को गलत ठहराने की विरोधी दल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस की कोशिश कितनी सही है ??

स्कूल और कॉलेज के हिन्दू छात्र-छात्रा को हिंदू धर्म के बारे में ज्ञान करवाना गलत कैसे साबित होगा ??

अपने 65 साल के शासन काल में कांग्रेसियों ने तो भारत के मूल इतिहास और धर्म ग्रंथ को खत्म करने और भुलाने में  कोई कसर नहीं छोड़ी अब अगर भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना की सरकार में लोग अपने देश की सनातन संस्कृति से जुड़ रहे है है तो इसमें गलत क्या है ??

 

 

 

 

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