मानसिक संतुलन खो चुके हैं कांग्रेसी

 (कर्ण हिंदुस्तानी )
कई दशकों तक सत्ता का सुख भोगने वाले कोंग्रेसी अब सत्ता हाथ से जाते ही बौखला गए हैं , इन कांग्रेसियों को अब मोदी अपना सबसे बड़ा दुश्मन दिखने लगा है। यही वजह है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेतागण अब अपना मानसिक संतुलन खो कर कुछ भी अनाप शनाप बकने लगें हैं। प्रधानमंत्री की गरिमामय कुर्सी तक को यह कोंग्रेसी कुछ भी नहीं समझ रहे हैं। मणिशंकर अय्यर इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है। जिस व्यक्ति को जनता ने पूर्ण बहुमत से चुन कर प्रधानमंत्री बनाया , उस व्यक्ति को नीच कहना कांग्रेसियों की दिमागी हालत का हवाला ही देती है। आज भले ही राहुल गाँधी ने अय्यर को पार्टी से निकाल दिया है। मगर राहुल गाँधी यह क्यों भूल जातें हैं कि उनकी माता जी ने भी चुनावी सभाओं में मोदी जी को लाशों का सौदागर कह कर सम्बोधित किया था। सही मायने में देखें तो नीचता की हर हद पार कर चुकें हैं कांग्रेस के वरिष्ठ और कनिष्ठ नेतागण। सत्ता सुंदरी का जमकर भोग लगाने वाले इन कांग्रेस के नेताओं से कोई यह क्यों नहीं पूछता कि आपके राज में कौन सा विकास हुआ था। नेहरू जी से लेकर इंदिरा जी तक और उसके बाद राजीव गांधी से लेकर मनमोहन सिंह तक देश ने भले ही तरक्की की हो , तमाम कल कारखाने लगे हों , मगर गरीब जनता और भी गरीब होती चली गई , क्या यह सच नहीं है ? पूंजीपतियों को आगे कर देश की तिजोरी को लूटने का गोरख धंधा कांग्रेस के राज में ही शुरू हुआ था , इंदिरा जी के एक मात्र फोन कॉल पर बैंक वाले हज़ारों – लाखों रूपये सामने वाले को दे देते थे , क्या यह सत्य नहीं है। पार्टी फण्ड के नाम पर धन जमा करने की शुरुआत कांग्रेस ने ही की थी। आज यही कोंग्रेसी मोदी जी और बीजेपी को कोस रहे हैं। विकास का सवाल उठा रहे हैं , कांग्रेस के राज में विकास क्या कर रहा था। क्यों देश की जनता को कुछ साल पहले भोजन का अधिकार दिया गया। क्या यही कांग्रेस का विकास था  कि जनता को आज़ादी के बाद दशकों तक भोजन का अधिकार नहीं था। अब इन कांग्रेसियों की मानसिक स्थिति खराब हो चुकी है , तभी तो मुँह में जो आ रहा है बके जा रहे हैं।
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