विश्व पर्यावरण असंतुलन से जूझ रहा है. और शिवसेना मनसे को इसमें भी राजनिति सुझ् रहा है.

( राजेश सिन्हा )

वर्ष १९९९ में एक फिल्म आई थी शूल, जिसके एक दृश्य में फिल्म के खलनायक बच्चू (भैयाजी) यादव (फिल्म अभिनेता सयाजी शिंदे) पर विधानसभा के अंदर एक दृश्य फिल्माया गया है. जिसमे एक विधायक नदी पर बाँध बनाकर उस पानी से बिजली उत्पाद की बात करता है जिसका ठेठ बिहारी में विधायक बच्चू यादव विरोध करता है. मुर्खता पूर्ण ढंग से विधान सभा में बोलता है की किसानो को पहले से ही साबुत पानी नहीं मिलरहा है अगर पानी में से बिजली भी निकाल ली गई तो किसानो के पानी में बचा क्या है. ( देखे विडियो )

 

 

कुछ इसी तरह की स्थिति महाराष्ट्र की राजनीति में भी बन गयी है. राज्य के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणविस राज्य भर में प्रदूषण मुक्त दिवाली मनाने का आवाहन कर रहे है. वहि राज्य में उनके सत्ता में सहयोगी शिवसेना,महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना,के साथ कांग्रेस और राकपा भी अनेक तर्क देकर मुख्यमंत्री के आवाहन का मजाक उड़ा रही है. कोई युवको का रोजगार ख़त्म होने का वास्ता दे रहा है तो कोई हिन्दू सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों पर कुठाराघात मान रहा है.इसी राजनीति उठापटक में शिवसेना के वरिष्ठ नेता और राज्य के पर्यावरण मंत्री रामदास कदम को कल फजीहत भी झेलनी पड़ी. जहा एक तरफ राज्य सरकार के कार्यक्रम में उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ सयुक्त रूप से प्रदूषण मुक्त दिवाली मनाने का आवाहन किया था. वहि मात्र चार घंटे बाद उन्होंने अपना बयान बदल दिया.और बोला धूम धडाके के साथ मनाओ दिवाली.

ये कैसी बिडंवना है, अक्टूबर १० तारीख तक मुबई व् उपनगरो के साथ राज्यभर में शाम को गरज के साथ बरसात जारी है.बिजली गिरने से लगातार लोगो की जान मुम्बई के आसपास के नगरो में जारही है.कल ही कोलाबा के सिआईएसएफ के तीन जबान थाणे में आसमानी बिजली से जख्मी हुए है.

देश भर में असमय बरसात, बाढ़,बादल फटना, चक्रबाती तूफ़ान, क्या इन बातो से कोई अनभिज्ञ है की ये सव पर्यावरण असंतुलन के कारण ही हो रहा है. पहले जहा जुलाई या गणपति विसर्जन तक बरसात ख़त्म माना जाता था वहि गणेश विसर्जन के लगभग दो महीने बाद भी नियमित रूप से हो रहे  बरसात के कारण पर क्या हमें एक बार विचार नहीं करना चाहिए ? पुरे विश्व में कमोबेश यही स्थिति है विश्व की सभी महाशक्तिया अमेरिका चीन,रूस,जापान,जर्मनी,फ़्रांस, के साथ विश्व के सभी देश पर्यावरण असुंतलन से होरहे प्रकोप से प्रभावित भी है और आतंकित भी है और युध्स्तर पर पर प्रदूषण कम करने के उपाय पर उपाय हो रहा है जिसमे सार्वधिक प्राथमिकता वृक्षारोपण को दिया जारहा है. भारत में भी केंद्र सरकार के साथ सभी राज्य सरकारो ने पर्यावरण समस्या को गंभीरता से लिया है जिसके तहत राज्यभर में वृक्षारोपण को प्राथमिकता, कोयला व् अन्य प्रदूषण फैलाने वाली  ऊर्जा की जगह वैकल्पिक ऊर्जा को प्रोत्साहन जिसमे शौर्य ऊर्जा वायु ऊर्जा,

इसी तरह पर्यावरण असंतुलन से हर नागरिक को आगाह करने के ली  के राज्य के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणविस के प्रदूषण मुक्त दिपावली मनाने के आवाहन का मजाक उड़ाया जाना कहा तक सही है इसका आत्ममंथन हर राजनितिक दल के नेताओं को करने की जरूरत है. कुछ राजनितिक दल इसे हिन्दू आस्था से जोड़ रहे है की भाई आतिशबाजियो का त्यौहार दिवाली पर प्रतिबंध हिन्दुओ पर अन्याय है.

भई जिन्हें पता है वे ये जानते है की पहली बार दिवाली रामायण में खुशिया मानते हुए पर्यावरण सरक्षण के तहत मनाया गया था लेकिन हिन्दू विरोधी ताकतों ने इस पवित्र त्यौहार का रूप ही बदल दिया, अब ये त्यौहार पर्यावरण दूषित करने वाला त्यौहार बनकर रह गया है. दिवाली की शुरुवात भगवान राम के लंका विजय के बाद अयोध्या वापसी के उपलक्ष में मनाई गयी थी इस दिन पुरे अयोध्या में घी के दिए जलाकर खुशिया मनाई गयी थी क्योकि पुरे अयोध्या में घी के दिए जलने से चोदह वर्ष बाद लौटे भगवान् श्रीराम को अयोध्या का वातावरण सवच्छ और तरोताजा मिले.ये सब रामायण में दर्ज है

घी के दिए जलाये जाने के पीछे जो उस समय के तर्क रामायण में दर्ज है,उसकी सच्चाई आज भी बनी हुई है. आज भी वैज्ञानिक ये मानते है की घी के दिए जलाए जाने से घर का वातावरण प्रदूषण मुक्त रहता है.

अब भगवान् राम के समय से प्रदूषण मुक्त करने के लिए  शुरू हुआ त्यौहार दीपो का उत्सव दिपावली अब प्रदूषण युक्त और दिवाला निकालने वाली दिवाली बनकर रह गयी.ऐसे में हिन्दुधर्म का वास्ता देकर धमाकेदार दिवाली मनाने के राजनेताओं के घोषणाओं पर एक बार फिर से  विचार करने और आम नागरिको को प्रदूषणमुक्त दिवाली मनाने के लिए प्रोत्साहित करने की जरुरत है.जिससे वेपटरी हुई हिन्दू धर्म की आस्था एकबार फिर से पटरी पर आये. और हिन्दू पुरानी आस्थाओं के साथ दिवाली की जगह दिपावली मनाना शुरू करे.

 

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