कल्याण में मोहन ग्रुप की हेलीपेड वाली मोहन अल्टिजा में किया गया लांखों वर्गफुट अवैध निर्माण

कुंभकर्णी नींद में सोता रहा मनपा प्रशासन, शिकायत के बाद संशोधन अर्जी की खारिज

कार्रवाई की तलवार लटकने से खरीदारों एवं ग्रुप के भागीदारों में मचा हड़कंप

(कर्ण हिंदुस्तानी)

कल्याण:- मोहन ग्रुप की हेलीपेड वाली मोहन अल्टिजा में नियमों को ताक पर रखकर लाखों वर्ग फुट अवैध निर्माण किया गया है और मनपा प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोता रहा और शिकायत के बाद कोई कार्रवाई तो नही हुई मगर लाखों वर्ग फुट एफएसआई निर्माण के उल्लंघनों को रेगुलाइज करने के लिए मोहन ग्रुप द्वारा दी गई मोहन अल्टिजा की अर्जी को केडीएमसी द्वारा अस्वीकार कर दिया गया है

जिससे मोहन अल्टिजा और भागीदारों पर कार्रवाई की तलवार लटकने से मोहन ग्रुपके भागीदारों और मोहन अल्टिजा में घर खरीदने वालों में हड़कंप मच गया हैं।

लांखों वर्ग फुट अवैध एफएसएआई निर्माण करने के बदले करोड़ों डकार चुकी अब केडीएमसी फिर से मोहन अल्टिजा / मोहन समूह द्वारा पेश की गई इच्छाओं को पूरा करके उनकी मदद करने जारहा है जो कानून के किसी भी अधिनियम में नहीं हैं।अवैध निर्माण के चलते विवादों में फंसी मोहन ग्रुप की हेलीपैड वाली ‘मोहन अल्टिज़ा’ के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में भी रिट पिटीशन दाखिल हो चुकी हैं, महत्वपूर्ण बात यह है कि यह रिट पिटीशन मे. लाइफ स्पेसेस एलएलपी (मोहन ग्रुप) के चेयरमैन जितेन्द्र लालचंदानी के सगे भाई महेश लालचंदानी ने दाखिल की है। चूँकि महेश लालचंदानी भी बिल्डर हैं जिससे उन्हें निर्माण क्षेत्र की बारीक से बारीक बात पता है कि जितेन्द्र लालचंदानी ने ‘मोहन अल्टिज़ा’ के निर्माण में क्या-क्या वायलेशन्स किए हैं। इसी लिए जितेन्द्र लालचंदानी और कल्याण डोम्बिवली महानगरपालिका (केडीएमसी) के अधिकारी भी मुसीबत में पड़ सकते हैं। महेश लालचंदानी ने ये रिट पिटीशन (नंबर-2165/2021) दाखिल की है। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायाधीश राजेश लोढ़ा की खंडपीठ के सामने पिटीशन की सुनवाई होगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि खंडपीठ ने पिटीशन स्वीकार कर ली है, महेश लालचंदानी ने मांग की है कि ‘मोहन अल्टिज़ा’ में जो अवैध निर्माण हुआ है केडीएमसी उसे तोड़े और साथ ही जितेन्द्र लालचंदानी और भागीदारों पर कानूनी कार्रवाई भी करे।।

मोहन ग्रुप की हेलीपैड वाली बिल्डिंग ‘मोहन अल्टिज़ा’ गृह संकुल में नियमों को ताक पर रख कर सभी फ्लैटों में अवैध तरीके से अलग-अलग फ्लैट के अलग-अलग अंगों में अवैध एफ एस आई बेची गई और बनाई गई हैं, ऐसी शिकायत सभी दस्तावेजी सबूतों के साथ ‘मोहन ग्रुप’ के पारिवारिक सदस्य महेश लालचंदानी ने ही की थी और सम्बंधित विभागों से दस्तावेज इकठ्ठा किए थे। मिले दस्तावेजों के अनुसार ‘मोहन अल्टिज़ा’ गृह संकुल में भारी मात्रा में लांखों वर्ग चोरी निर्माण किया गया और बेचा गया है। केडीएमसी अधिकारियों की मिलीभगत से जितेन्द्र लालचंदानी ने फ्लैट धारकों के साथ बड़ी धोखाधड़ी की हैं, अनुमान है कि जितेंद्र लालचंदानी ने पूरे प्रोजेक्ट को खड़ा करने में केडीएमसी के अधिकारियों और कर्मचारियों को करोड़ों रुपये रिश्वत दी है।

कल्याण (पश्चिम) में गन्धारे गांव में 11 लाख वर्ग फुट में विकसित ‘मोहन अल्टिज़ा’ नामक गृह संकुल में मोहन ग्रुप के चेयरमेन जितेन्द्र लालचंदानी ने करीबन ढाई लाख वर्ग फुट अवैध निर्माण कर लिया है। जितेन्द्र लालचंदानी ने इमारत निर्माण में किसी भी रूल्स-रेगुलेशन्स का पालन नहीं किया है जैसे सर्वे नंबर 15/5 और 23/1 भूखंड पर प्लान में पास प्रत्येक मंजिल पर रिफ्यूजी एरिया, सर्वेंट रूम, सर्वेंट ट्वायलेट की जगह, वाइड एरिया,डक्ट एरिया,सर्विस एरिया,ड्राई एरिया,फ्लॉवर बेड्स एरिया, कॉमन पैसेज एरिया और टेरेसेज को भी फ्लैट्स में अवैध तरीके कवर किया गया और बेच दिया गया है, रिवाइज्ड एंड रेगुलाइज बिल्डिंग परमीशन ही मोहन केडीएमसी ने रिजेक्ट कर दिया है। बाजार भाव के हिसाब से जितेन्द्र लालचंदानी ने अवैध निर्माण से करीब 200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई की है। अनुमान के अनुसार पूरा प्रोजेक्ट 1000 करोड़ रुपये का है।

रिट पिटीशन, महेश लालचंदानी की शिकायत और मौजूद दस्तावेजों के अनुसार जिस भूखंड (सर्वे नंबर- 15/5, 17, 62/1/2, 18, 23, 9 और 4) पर ‘मोहन अल्टिज़ा’ विकसित हुई है उसकी मूल मालकिन मालूबाई काशीनाथ मढ़वी हैं। मोहन ग्रुप के इस प्रोजेक्ट में 28-28 मंजिल की तीन इमारतें हैं। इसमें कुल 350 फ्लैट्स हैं। इसके भागीदार अमित गाँधी, राजेश किशिनसिंघानी, कुमा विधानी, लखी श्रृंगी, ओमप्रकाश मचनद्या, धीरज भाटिया, जीतू लालचंदानी, हरि भाटिया, मनोहर मचनद्या, सुनील हरचंदानी और तुषार लालचंदानी हैं और इसके आर्किटेक्ट जॉन वर्गीस हैं। महेश लालचंदानी ने सभी के खिलाफ धोखाधड़ी, एमआरटीपी एक्ट तथा भादंसं की अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई करने की मांग की है।

आश्चर्य पूर्ण जानकारी यह सामने आई है कि जितेन्द्र लालचंदानी ने मोहन ग्रुप के नाम से जितने भी प्रोजेक्ट विकसित किए हैं वह सब अवैध हैं, प्रशासन को अपनी जेब में रखने डिंग हांकने वाले मोहन ग्रुप के भागीदारों के हौसले बढ़े हुए हैं कि प्रशासन में बैठे कुछ भ्रष्ट्र अधिकारियों की मिलीभगत से एक के बाद एक अवैध इमारतों का निर्माण करते जा रहे हैं और अवैध निर्माण को पूरी तरह वैध निर्माण बता कर ग्राहकों को फंसाते जा रहे है।

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